पिथौरागढ़। समुद्रतल से 17 हजार फुट की ऊंचाई पर प्रतिवर्ष 11 जून से 31 अक्तूबर तक तकलाकोट में होने वाले अंतरराष्ट्रीय भारत-चीन व्यापार के शुरू होने में इस बार भी संशय के बादल गहरा गए हैं।
कोविड-19 और सीमा विवाद के कारण वर्ष 2020 में भारत-चीन व्यापार शुरू नहीं हो पाया था। इसके चलते भारत-चीन व्यापार में जाने वाले व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। वर्तमान समय में चीन की तकलाकोट मंडी में भारतीय व्यापारियों का करोड़ों का सामान फंसा हुआ है। इससे व्यापारी काफी चिंतित हैं। व्यापारी इस बार व्यापार शुरू कराने को लेकर कई बार विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को पत्र भी लिख चुके हैं लेकिन व्यापारियों को उन पत्रों का जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है।
बीआरओ के धारचूला से लिपूलेख तक सड़क पहुंचाने के बाद भारत-चीन व्यापार में जाने वाले व्यापारियों में खुशी का माहौल था। व्यापारियों को लगा था कि सड़क बनने से उन्हें तकलाकोट मंडी सामान पहुंचाने में दिक्कत नहीं होगी। तकलाकोट में भारत और चीन के व्यापारियों के बीच प्रतिवर्ष 11 जून से 31 अक्तूबर तक अंतरराष्ट्रीय व्यापार चलता है। वर्ष 2019 में तकलाकोट गए भारतीय व्यापारी बचा सामान वहीं छोड़कर लौट आए थे, लेकिन इस वर्ष कोविड-19 और भारत-चीन के खराब संबंधों के चलते व्यापार शुरू नहीं हो पाया है। कुछ व्यापारियों ने तकलाकोट जाने के लिए सामान तैयार रखा था।
उन्हें उम्मीद थी कि 2021 में तकलाकोट जाने का मौका मिलेगा, लेकिन भारत में चीनी सामान के बहिष्कार के बाद प्रतिवर्ष व्यापार में जाने वाले व्यापारियों में निराशा है। तकलाकोट मंडी में 45 व्यापारियों का एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का सामान फंसा है। स्थानीय प्रशासन भी व्यापारियों को ठोस जवाब नहीं दे पा रहा है। इससे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। भारत-चीन के बीच गुड़, मिश्री , कॉस्मेटिक सामान, बर्तन, चाय, छिरपी सहित कई अन्य चीजों का व्यापार होता है।(संवाद)
कोरोना काल में नहीं की व्यापारियों की मदद
पिथौरागढ़। सीमांत क्षेत्र धारचूला से प्रतिवर्ष भारत-चीन व्यापार में जाने वाले व्यापारी सीमा विवाद और कोरोना के कारण व्यापार पर नहीं जा पाए। इससे व्यापारियों में आर्थिक संकट गहरा गया था। व्यापारियों को उम्मीद थी कि सरकार कोरोना काल में उनकी मदद करेगी, लेकिन सरकार ने उनकी कोई भी मदद नहीं की।(संवाद )
इससे पूर्व 1962 में बंद हुआ था व्यापार
पिथौरागढ़। भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के बीच व्यापार की पुरानी परंपरा है। वर्ष 1962 के युद्ध के बाद ये व्यापार बंद हो गया था। 30 साल बाद फिर वर्ष 1992 में दोनों देशों की सहमति के बाद इसे फिर शुरू कर दिया। व्यापार के लिए एक जून से 30 सितंबर का समय तय है लेकिन कई बार इसका समय बढ़ाकर 31 अक्तूबर भी कर दिया जाता है। भारत-चीन व्यापार को लेकर चीन के व्यापारियों में उत्साह कम है। वर्ष 2002 से कोई भी चीनी व्यापारी भारतीय मंडी गुंजी नहीं पहुंचा, लेकिन भारतीय व्यापारी प्रतिवर्ष तकलाकोट पहुंचते हैं।(संवाद)
भारत-चीन के बीच दोनों देशों के बीच सदियों से व्यापार की परंपरा रही है। सीमा विवाद और कोरोना के कहर के कारण 2020 में भारत-चीन व्यापार शुरू नहीं हो पाया था। इस बार व्यापार शुरू कराने को लेकर गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को कई बार पत्र लिख दिया है, लेकिन उस पत्र का जवाब आज तक नहीं मिल पाया है। व्यापार शुरू नहीं होने से व्यापारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
फोटो विवरण-10पीटीएच 12पी- दिनेश गुंज्याल, उपाध्यक्ष भारत-चीन व्यापार समिति।
भारत-चीन व्यापार को लेकर भारत सरकार से अभी तक कोई दिशा निर्देश या पत्र नहीं मिला है। व्यापार शुरू कराने को लेकर सीमांत के व्यापारी लगातार ज्ञापन दे रहे हैं। जिन्हें भारत सरकार को भेजा जा रहा है।
केएन गोस्वामी, एसडीएम धारचूला।