दारमा घाटी स्थित पंचाचूली में दिख रही हल्की बर्फ। संवाद
धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा घाटी (10500 फुट) के माइग्रेशन के गांवों में पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार ठंड का असर कम रहा। इससे ग्रामीण भी चिंतित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जहां ठंड होनी चाहिए वहां गर्मी का अहसास हो रहा है। पंचाचूली की चोटियों पर भी बर्फ कम दिखाई दी।
ग्राम पंचायत दांतू निवासी सोनू सिंह दताल और प्रेम सिंह दताल का कहना है कि दारमा घाटी के लिए सोबला-ढाकर सड़क निर्माण का कार्य वर्ष 2009 से 2019 तक चला। घाटी के सड़क मार्ग से जुड़ जाने के बाद सेना, आईटीबीपी के साथ ही पंचाचूली दर्शन को आने वाले पर्यटक और ग्रामीणों की वाहनों से आवाजाही काफी अधिक हो गई। उनका कहना है कि घाटी के 14 माइग्रेशन गांवों में पिछले सालों की तुलना में इस बार लोगों को ठंड की अपेक्षा गर्मी महसूस हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों से पंचाचूली ग्लेशियर में भी बर्फबारी कम हो रही है। ग्राम प्रधान दांतू जमन सिंह दताल और होम स्टे संचालक पानू दताल ने उच्च हिमालयी गांवों में भी ग्लोबल वार्मिंग का असर होने पर चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे बचने के लिए लोगों को अभी से तैयारी कर लेनी चाहिए। संवाद
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वाहन और यात्रियों की आवाजाही से आया बदलाव
धारचूला। उत्तर प्रदेश से लखन सिंह दताल और गोपाल सिंह दताल दोनों भाई सपरिवार इन दिनों अपने गांव दांतू में पूजा के लिए पहुंचे हैं। वह भी गांव में ठंड कम होने से चिंतित हैं। उनका कहना है कि वाहन और यात्रियों की आवाजाही ज्यादा होने से मौसम में भी बदलाव आ गया है। कहा कि ग्लोबल वार्मिंग का असर अब दारमा घाटी में भी हो रहा है। संवाद
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नहीं पड़ी गर्म कपड़ाें की जरूरत
धारचूला। दांतू गांव की मानती दताल और रंजना दताल ने बताया कि एक सप्ताह के लिए गांव की पूजा में भाग लेने आए थे। सोचा गांव में ठंड काफी होगी। इसके चलते गर्म कपड़े और जैकेट भी रख लिए लेकिन गांव में ठंड कम होने के चलते इन कपड़ों की जरूरत ही नहीं पड़ी।