कैलाश मानसरोवर की यात्रा पूरी कर लौटने वाले यात्री इस बार भी दोपहर भोजन के लिए पिथौरागढ़ स्थित पर्यटक आवासगृह में आएंगे। वापसी के समय का यात्रा रूट धारचूला से मिर्थी, ओगला, कनालीछीना, पिथौरागढ़, दन्या होते हुए जागेश्वर धाम रहेगा। कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए शेड्यूल इस तरह बनाया जाता है कि हर अगला दल ठीक चार दिन बाद चलेगा। तब तक पड़ावों पर व्यवस्थाएं बनाने का समय मिल जाता है।
कैलाश मानसरोवर यात्री इस बार भी जाते समय काठगोदाम से अल्मोड़ा होते हुए सेराघाट, बेड़ीनाग, थल, डीडीहाट, मिर्थी के रास्ते आधार शिविर धारचूला पहुंचेंगे। जाते समय यात्रियों का दोपहर भोजन डीडीहाट में होगा। लौटते समय पिथौरागढ़ में दोपहर भोजन के बाद यात्री उस दिन जागेश्वर धाम को जाएंगे। यदि किसी कारणवश यात्रियों को पिथौरागढ़ पर्यटक आवासगृह में रुकना पड़ा तो उनकी रवानगी अगले दिन सुबह होगी। पर्यटक आवासगृह के प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि यात्रियों को दोपहर भोजन में सात्विक सामग्री परोसी जाएगी। यात्रियों से मानसरोवर स्मृति वन में पौधरोपण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि टीआरसी में यात्रियों के भोजन का बेहतर प्रबंध रहेगा।
कैलाश मानसरोवर यात्रा का यह रूट कई वर्षों से इसी तरह चल रहा है, लेकिन इसमें एक चुनौती यह भी है कि यदि कहीं पर बारिश के दौरान रास्ता बंद हो जाए तो रूट बदलना पड़ जाता है। धारचूला और पिथौरागढ़ के बीच रास्ता बंद होने के कारण पिछले वर्षों में कई बार यात्रियों को धारचूला से डीडीहाट होते हुए आगे को भेजना पड़ा था। केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि प्रशासन से रास्ता सही करने के लिए कहा गया है। बारिश के दौरान सड़कों पर यातायात सामान्य बनाए रखने के लिए कहा गया है।
इन स्थानों पर रहता है रोड बंद होने का खतरा
धारचूला से पिथौरागढ़ के बीच जौलजीबी, बेड़ा, अस्कोट, बंदरलीमा में रोड बंद होने का खतरा रहता है। पिथौरागढ़ से अल्मोड़ा को निकलते समय घाट, ध्याड़ी, मकड़ाऊ में भी कई बार यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ती है। लंबे समय से इन स्थानों पर समस्या बनी रहने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।