तिब्बत की मंडी तकलाकोट के लिए इस बार भी गुड़ और मिश्री का निर्यात नहीं होगा। चीन सरकार ने पिछले वर्ष से गुड़ और मिश्री का व्यापार करने पर रोक लगा दी थी। इसके बदले में व्यापारी गुड़ से बनी गजक के पैकेट तकलाकोट मंडी ले जाने लगे हैं। तिब्बत के लोग गुड़ और गुड़ से बनी वस्तुओं को काफी पसंद करते हैं। पिछले साल से गुड़ के व्यापार पर रोक लगने के बाद व्यापारियों ने उसके विकल्प के तौर पर गजक के पैकेट ले जाने शुरू किए हैं। गजक के पैकेट में मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी दोनों तिथियां अंकित रहती हैं। पिछले साल तिब्बत की मंडी में 1200 किलोग्राम गजक पहुंची थी।
चीन सरकार ने गुड़ और मिश्री के खुला बिकने पर इस कारण रोक लगा दी थी कि एक तो इससे गंदगी फैलती है और दूसरी ओर इसमें मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी तिथियों का कहीं पर भी उल्लेख नहीं होता। इस कारण यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। व्यापारियों ने बताया कि तकलाकोट मंडी को इस बार भी गजक की सप्लाई की जाएगी। गजक में कम से कम छह महीने तक उपयोग की अवधि रहती है। व्यापारियों ने बताया कि गजक में मुनाफा अच्छा मिल जाता है। यदि भारतीय बाजार से 100 रुपये किलो गजक खरीदा जाए तो तकलाकोट में उसकी कीमत कम से कम 250 रुपये मिल जाएगी। इसमें ढुलान भाड़ा और मुनाफा दोनों शामिल रहेगा।
भारत-तिब्बत व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली ने बताया कि तकलाकोट में भारतीय वस्तुओं की मांग बहुत रहती है। भारतीय कॉफी, खिलौने, स्टील के बर्तनों की अच्छी मांग है। उन्होंने बताया कि यदि व्यापार में कुछ अन्य वस्तुओं को शामिल कर दिया जाए तो सीमांत के व्यापारियों को काफी फायदा मिल जाएगा। इस बार भी गजक के पैकेट ले जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
इधर, नामित ट्रेड अधिकारी/एसडीएम आरके पांडे ने बताया कि व्यापारी लगातार परमिट के लिए आवेदन कर रहे हैं। इस बार जून अंतिम सप्ताह में व्यापारियों का पहला जत्था तिब्बत की मंडी के लिए रवाना हो जाएगा। व्यापार शुरू होने से पहले गुंजी में अस्थायी ट्रेड कार्यालय खुल जाएगा। इसके अलावा स्टेट बैंक की अस्थायी शाखा, कस्टम आफिस और पुलिस थाना भी काम करने लग जाएगा। इस बार व्यापारियों में पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा उत्साह है।