पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में छह महीने से पैथोलॉजिस्ट नहीं है। पैथोलॉजिस्ट के बिना तकनीशियन खून की जांच कर रहे हैं। उनके हस्ताक्षर से ही रिपोर्ट भी जारी हो रही हैं।
जिला अस्पताल में कार्यरत पैथोलॉजिस्ट डॉ. नरेंद्र शर्मा के प्रमोशन के बाद बांड पर पैथोलॉजिस्ट की तैनाती की गई थी। बांड खत्म होने के बाद लैब में पैथोलॉजिस्ट नहीं आया है। सीमांत के मरीजों को हर बीमारी का उपचार स्थानीय स्तर पर मिल सके, इसके लिए जिला अस्पताल और इससे संबद्ध महिला अस्पताल संचालित हैं। अस्पतालों में हर रोज करीब एक हजार से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। ज्यादातर मरीजों को चिकित्सक बीमारियों का पता लगाने के लिए खून की जांच की सलाह देते हैं। अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट का पद छह महीने से रिक्त चल रहा है।
मरीजों की खून की जांच टेक्नीशियन कर रहे हैं। उन्हीं के हस्ताक्षर से रिपोर्ट भी जारी हो रही है। ईएनटी चिकित्सक मरीजों के गले और कानों के नीचे गांठ होने पर एफएनएसी टेस्ट के लिए परामर्श देते हैं। टेस्ट में टीबी और कैंसर जैसी बीमारी की प्राथमिक स्थिति का भी पता चल जाता है। जानकारी के मुताबिक यह जांच अस्पताल में लगभग 200 रुपये में हो जाती है।
बीते छह महीने से अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट नहीं होने से मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। जहां उन्हें इस जांच के 1000 से 15000 रुपये खर्च करना पड़ रहा है। संवाद
कोट
अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए निदेशालय से पत्राचार किया गया है। जल्द ही अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट की तैनाती हो जाएगी। मरीजों को अस्पताल में परेशानी न हो इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। - भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल पिथौरागढ़।