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Pithoragarh News: प्राइमरी शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा से मुक्ति के लिए तानी मुट्ठी

Fri, 10 Jul 2026 10:45 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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चंपावत/टनकपुर। उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन ने सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने सरकार पर तुगलकी फरमानों के जरिये शिक्षकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों ने पुरानी पेंशन बहाली और आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी रूप से मुक्त करने की पुरजोर मांग की।
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शुक्रवार को एसोसिएशन के अध्यक्ष कवींद्र सिंह तड़ागी के नेतृत्व में शिक्षकों ने तहसील में सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि लागू किए गए पात्रता मानदंडों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता के नियमों के स्थायी समाधान के लिए विधायी हस्तक्षेप किया जाना जरूरी है।
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उन्होंने समाधान नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। एसोसिएशन ने एसडीएम सदर विपिन चंद्र जोशी के माध्यम से प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री उत्तराखंड को मांगों का ज्ञापन भेजा।
प्रदर्शन में ब्लॉक मंत्री हरि विनोद पंत, रमेश चंद्र थ्वाल, तनुजा वर्मा, नीतू आर्या, प्रियंका, ममता भट्ट, नवीन चंद्र जुकरिया, रुद्र सिंह बोहरा, पुष्कर दत्त, राजेंद्र सिंह बिष्ट आदि रहे।


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टनकपुर में शिक्षकों ने किया प्रदर्शन
टनकपुर। शुक्रवार को स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन इकाई के अध्यक्ष देवेंद्र खड़ायत, मंत्री सूरज प्रकाश जोशी आदि के नेतृत्व में शिक्षक तहसील परिसर पहुंचे। आक्रोशित शिक्षकों ने टीईटी से स्थायी छूट, पुरानी पेंशन बहाली के साथ ही शिक्षकों के सेवा अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक शासनादेश और विधिक कार्रवाई कराने समेत चार सूत्री मांग उठाई। सीएम और शिक्षा मंत्री को तहसीलदार पिंकी आर्या के माध्यम से ज्ञापन भेजा। सौंपा। ज्ञापन में कहा कि आरटीई लागू होने से पहले और औपबंधिक व्यवस्था के अंतर्गत नियुक्त शिक्षक वर्षों से पूर्ण निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। ऐसे शिक्षकों पर वर्तमान में सेवा में बने रहने अथवा पदोन्नति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू किया जाना न्यायोचित नहीं है। इससे संशोधन कराकर छूट देने, अक्तूबर 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों पर लागू नवीन पेंशन योजना वृद्धावस्था में सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने में अपेक्षित रूप से सक्षम सिद्ध नहीं हो रही है। पुरानी पेंशन बहाली पर जोर दिया और समर्थन में नारेबाजी की गई। इस दौरान कोषाध्यक्ष कल्याण चंद, देवी दत्त जोशी, जोगेंद्र चंद, होशियार सिंह, मानू चंद, विनोद गहतोड़ी, भुवन जोशी, रितु पंत, गौरी भट्ट, राधेश्याम राणा, जीवन सिंह, गोपाल चंद, कल्पना आर्या आदि मौजूद रहे।
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