तिब्बत की मंडी तकलाकोट गए सीमांत के व्यापारियों का एक शिष्टमंडल 12 अक्तूबर को नाभीढांग दौरे पर आ रहे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू और कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा से मिलेंगे। भारत-तिब्बत अंतरराष्ट्रीय स्थल व्यापार की अवधि 15 अक्तूबर तक किए जाने से व्यापारी खासे नाराज हैं और उनको इस बार सरकार के फैसले से भारी नुकसान उठाना पड़ जाएगा। तकलाकोट मंडी में इसी महीने चीन के खरीददार सामान लेने आते हैं। सितंबर में सामान की बिक्री नाममात्र की हुई थी।
तिब्बत की मंडी तकलाकोट से सीमांत के व्यापारी जीवन रौंकली, चकर सिंह गर्ब्याल, दिनेश गुंज्याल, दौलत सिंह रायपा, दीवान सिंह गर्ब्याल, अर्चना देवी आदि ने कहा कि इस बार प्रशासन ने जून में व्यापारियों को परमिट जारी नहीं किए थे। व्यापारियों का पहला जत्था जुलाई में तकलाकोट पहुंचा था। अब व्यापार को समय से पहले समेटने की तैयारी की जा रही है। सरकार और प्रशासन के यह सारे कदम व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने वाले हैं।
कहा कि वह अपनी समस्या को प्रदेश के मुख्यमंत्री तक पहुंचा चुके हैं और 12 अक्तूबर को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के सम्मुख भी मामले को रखा जाएगा। भारतीय व्यापारी जितना भी सामान तकलाकोट ले गए हैं उसमें से अब तक मात्र 40 फीसदी सामान ही बिक पाया है। यदि व्यापारियों को 15 अक्तूबर तक लिपुलेख दर्रा पार करना पड़ा तो उनको 13 अक्तूबर को ही तकलाकोट मंडी छोड़नी पड़ जाएगी। समय से पहले मंडी छोड़ने के आदेश से सभी व्यापारी भारी तनाव की स्थिति में हैं।
सीमांत के व्यापारी स्टील के बर्तन, रेडीमेड कपड़े, चाय, काफी, बिसाता समेत अन्य सामान लेकर तकलाकोट पहुंचे हैं। इधर, भारत-तिब्बत व्यापार के ट्रेड सहायक पीएस कुटियाल ने कहा कि शासन से जिस तरह का आदेश मिलेगा उसका पालन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल व्यापारियों को 15 अक्तूबर तक वापस लौटने का आदेश हुआ है। यदि इसमें कोई संशोधन हुआ तो उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।