सौनपट्टी का प्रसिद्ध चौपखिया मेले में सोमवार को सैकड़ों लोग उमड़े। मेले का मुख्य आकर्षण चौमू लोकदेवता का डोला होता है। लोगों का विश्वास है कि चौमू देवता क्षेत्र में खुशहाली लाते हैं। मेला समाप्त होते ही क्षेत्र में बारिश भी हुई। कृषि उपकरणों, मिठाई, खिलौने, सौंदर्य प्रसाधनों की खूब बिक्री हुई। मेले में कई अस्थायी दुकानें लगी थी।
कहा जाता है कि करीब 1200 वर्ष पहले इस क्षेत्र में काली कुमाऊं से 7 भाई चौमू देवता के दरबार में मनोकामना मांगने आए थे। उनकी मनोकामना पूरी हो गई। तब से चौमू देवता की कई जगह पूजा होती है। मंदिर के पुजारी प्रेम चंद्र जोशी बताते हैं कि चौमू देवता की चार भुजाएं होती हैं। जिसमें से 2 भुजाओं में अपार शक्ति होती है। मंदिर के चार छत्र की वजह से इसका नाम चौपखिया पड़ा है।
मेले का उद्घाटन डीडीहाट विधायक विशन सिंह चुफाल और पूर्व प्रदेश महामंत्री सुरेश जोशी ने किया। मेले में विधायक मयूख महर, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रकाश जोशी, नगरपालिका अध्यक्ष जगत सिंह खाती, कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत, भाजपा नेता प्रकाश पंत और पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष राजेंद्र सिंह रावत आदि थे।
मंदिर के आचार्य श्याम दत्त जोशी बताते हैं कि रामनवमी के दिन लगने वाले मेले में रियांसी, चौपखिया, मूनाकोट, मड़ेगांव, सूवाकोट, वड्डा, लांगड़ी, कोसेरी, सेलौनी और बडारी गांवों सहित पूरे सौन पट्टी के लोग आते हैं। मंदिर में दो डोले निकलते हैं। दोनों डोले एक घंटे के अंतराल में आते हैं। डोले में डंगरिया श्याम सिंह खड़ायत और त्रिलोक सिंह खड़ायत लोगों को आशीर्वाद देते हैं। मंदिर में राम सिंह भगवती और मोहन सिंह लटेश्वर देवता है डंगरिया होते हैं। डोला निकलने के बाद मंदिर में हवन और पूर्ण आहुति दी जाती है।
मेले में कृषि उपकरणों हल, कुदाल आदि की खूब बिक्री हुई। मेले में नेपाल से लेकर हल्दू तक के लोग खरीददारी के लिए पहुंचे। हल्दू के हल बनाने वाले कारीगर लक्ष्मण राम ने बताया कि इस बार अन्य वर्षों की तुलना में ज्यादा बिक्री हुई है। जसपुर के रेडिमेड व्यापारी मो. अनीफ ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना कपड़ों की बिक्री बहुत कम है। मेले में सुरक्षा के इंतजाम कड़े थे। सभी तरह के चार पहिया वाहनों को वड्डा बाजार से पहले रोका जा रहा था। मेले को संपन्न कराने में ग्राम प्रधान टेक बहादुर खड़ायत, कमलेश खड़ायत, श्याम सिंह, तारा दत्त जोशी आदि ने सहयोग दिया।