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एक रस्सी से बंधी ट्राली के सहारे नदी पार करने को मजबूर फिलम के लोग

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धारचूला के फिलम गांव के लिए लगी इस ट्राली में आवाजाही करने को मजबूर हैं लोग। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला (पिथौरागढ़)। सीमांत धारचूला तहसील के फिलम गांव तक जाने के लिए एक पुल तक नहीं है। यहां के लोगों को हर साल बरसात में एक रस्सी लगी ट्रॉली के सहारे नदी को पार कर गांव तक पहुंचना पड़ता है। इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
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फिलम युवक मंगल दल के अध्यक्ष जयेंद्र फिरमाल ने कहा कि 2011 से ग्रामीण झूला पुल बनाने की मांग कर रहे है। 2019 में रं संस्था के एजीएम के उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत झूलापुल निर्माण की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन जरूरी कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं। 61 वर्षीय सरस्वती देवी ने बताया कि 2000 से 2013 के बीच ग्रामीण अपने संसाधनों से लकड़ी का पुल बनाते रहे हैं, लेकिन 2013 के आपदा के बाद ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया।
ग्रामीण सरकार की बेरुखी के कारण मौलिक सुविधाओं से भी वंचित जीवन जीने को मजबूर हैं। 60 वर्षीय देवकी देवी ने कहा कि ट्रॉली भारी होने के कारण युवक तो अधिक ताकत लगाकर पार पहुंच जाते हैं लेकिन बच्चों, महिलाओं को ट्रॉली से यात्रा करने में मुश्किलें आती हैं। इस लिए छह किमी घूमकर दुग्तु पहुंचते हैं। गोविंद बोनाल और अरविंद बोनाल ने कहा कि झूला पुल के बनने से फिलम के साथ ही ग्रामसभा बोन के ग्रामीणों को भी राहत मिलेगी। अभी ग्रामीणों को 15 मिनट का सफर तय करने के लिए तीन से चार घंटे का समय लग रहा है।
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ग्रामीणों ने महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को हो रही दिक्कतों के बारे में अवगत कराया गया है। जल्दी ही वैकल्पिक पुल बनाने का कार्य कराया जाएगा।
- अनिल कुमार शुक्ला, उपजिलाधिकारी धारचूला।
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