बहाल नहीं हो सकी कई गांवों की पेयजलापूर्ति
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। 30 जून और एक जुलाई को आई आपदा से डीडीहाट ब्लॉक के दर्जनों गांवों की पेयजल योजनाएं बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। आपदा के तीन माह बीतने के बाद भी इन पेयजल योजनाओं की मरम्मत नहीं हो पाई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। जल संस्थान ने कुछ बड़ी योजनाओं की अस्थायी तौर पर मरम्मत तो कर दी लेकिन ग्रामीण पेयजल योजनाओं की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। अब बारिश समाप्त हो गई है और लोगों को पेयजल का संकट झेलना पड़ रहा है।
आपदा से डीडीहाट ब्लॉक के देवीसूना, खेतार कन्याल, मौगड़ा, कूटा खेतार, स्याल्बे, हाट, भालूउडियार, रानीखेत, रजगोड़ा, पमस्यारी, पाटीसेरा, घोरपट्टा सहित कई अन्य गांवों की पेयजल योजनाएं क्षतिग्रस्त हो गई थी। कई एकल ग्रामीण पेयजल योजनाओं के क्षतिग्रस्त होने से दूरस्थ गांवों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। खेतार कन्याल के बीडीसी सदस्य महेश कन्याल ने बताया कि तीन माह से पानी के लिए ग्रामीण रोजाना सुबह, शाम को दो से तीन किमी दूर प्राकृतिक जलस्रोत्रों में जाने को मजबूर हैं।
कुछ दिन पूर्व तक तो मवेशियों के लिए बारिश के पानी से ग्रामीण अपना काम चला रहे थे लेकिन अब बारिश के बंद होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के हालत खराब हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि गंदे स्रोतों का पानी उपयोग में लाया गया तो बीमारी फैलने का खतरा हो सकता है। लोगों का कहना है कि प्रशासन, सरकार ने आपदा के तुरंत बाद पानी की योजनाओं की मरम्मत प्राथमिकता से कराने का फैसला लिया था लेकिन डीडीहाट ब्लॉक में सबसे ज्यादा नुकसान होने पर भी मरम्मत का काम शुरू नहीं हो पाया है।
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता बिलाल यूनुस ने बताया कि जल संस्थान की 70 योजनाएं और 100 से अधिक ग्रामीण एकल पेयजल योजनाओं को आपदा से भारी क्षति हुई है। इन योजनाओं के पुनर्निर्माण के लिए शासन को आगणन भेज दिए हैं। उन्होंने कहा कि योजनाओं की मरम्मत के लिए पैसा आते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। नगरीय पेयजल योजनाओं को भी अस्थायी रूप से चलाया गया है। उनकी भी स्थायी तौर पर मरम्मत की जाएगी।