गणाईगंगोली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर तैनात न होने से एक प्रसव पीड़िता की इलाज के अभाव में मौत हो गई। इसके बाद लोगों में सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जबरदस्त रोष है। लोग आंदोलन की रणनीति बनाने लगे हैं।
मंगलवार रात करीब 8 बजे चौनलया (कुनल्ता) निवासी ममता देवी (21) पत्नी बालम राम को प्रसव पीड़ा हुई। परिजन ममता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गणाईगंगोली लेकर आए। उसे आठवां महीना था। स्टाफ नर्स ने सीजेरियन की जरूरत बताते हुए अल्मोड़ा रेफर कर दिया। कुछ किलोमीटर आगे जाने पर ममता की प्रसव पीड़ा और बढ़ गई। उसे सेराघाट अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां ममता ने स्वस्थ लड़की जन्म दिया। बच्ची को जन्म देने के बाद उसकी तबियत और बिगड़ गई। अस्पताल से उसे अल्मोड़ा रवाना किया गया। अल्मोड़ा अस्पताल पहुंचने से पहले ममता की मौत हो गई। ममता की इससे पहले डेढ़ साल की लड़की है।
वहीं, महिला की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। लोग सरकारी अव्यवस्थाओं और गणाईगंगोली में डॉक्टर की कमी को ममता की मौत के लिए जिम्मेदार मान रहे हैं। कुनल्ता की प्रधान कल्पना पंत, क्षेत्र पंचायत सदस्य दीपा देवी, रमेश नियोलिया, गोविंद बल्लभ पंत, किशन राम, हरीश राम ने कहा कि यदि एक लेडीज डॉक्टर भी गणाईगंगोली अस्पताल में तैनात होती तो ममता की जान बच सकती थी। दो बच्चियों को मां नहीं खोनी पड़ती। इन लोगों ने 30,000 की आबादी के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बंद करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को अस्पताल में डॉक्टर तैनात करने में देर नहीं करनी चाहिए, अन्यथा इलाके के लोग लामबंद होकर आंदोलन करेंगे।