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न्यायालय ने दी साथ रहने की इजाजत

Tue, 23 Jun 2015 11:55 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, पिथौरागढ़
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न्यायिक मजिस्ट्रेट पिथौरागढ़ की अदालत ने घर वालों की मर्जी के खिलाफ अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़े को साथ में रहने की इजाजत दे दी है। दोनों बालिग थे और दोनों ने विवाह कर लिया था।
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युवती के हिंदू और युवक के गैैर हिंदू होने की वजह से हिंदूवादी संगठनों ने पुलिस, प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।  यहां एक गांव की युवती 10 जून को सहारनपुर के युवक के साथ घर से चली गई।

13 जून को परिजनों ने युवती के गायब होने की रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई। उपनिरीक्षक विमल मिश्रा के नेतृत्व में सहारनपुर गई पुलिस टीम युवक और युवती को पकड़कर ले लाई। दोनों ने इलाहाबाद में शादी कर ली थी।
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 पुलिस ने मंगलवार को युवक-युवती को न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) अविनाश श्रीवास्तव की अदालत में पेश किया। कोतवाल गणेश सिंह सामंत ने बताया कि युवती ने न्यायालय में अपनी मर्जी से युवक के साथ जाने, युवक द्वारा किसी प्रकार का प्रलोभन न दिए जाने और युवक के साथ ही रहने की बात कही।

इस आधार पर न्यायालय ने युवती को युवक के सुपुर्द करने का आदेश दिया। पुलिस का कहना है कि युवक की युवती से पिथौरागढ़ में ही एक-दो बार मुलाकात हुई। इसके बाद फोन पर बात होती रही।

दोनों ने शादी करने का फैसला ले लिया। कोतवाल ने बताया कि युवक-युवती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दायर कर अंतरजातीय विवाह करने के कारण जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी।

हाईकोर्ट के आदेश पर सहारनपुर पुलिस के उप निरीक्षक अरुण कुमार के नेतृत्व में पुलिस की टीम युवक-युवती की सुरक्षा में तैनात थी।

 न्यायालय के आदेश के बाद यूपी पुलिस की सुरक्षा में युवक-युवती सहारनपुर रवाना हो गए। उधर, हिंदूवादी संगठनों और भाजपा के लोगों ने ढिलाई का आरोप लगाते हुए पुलिस, प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।

इन लोगों का कहना था कि बाहर से आने लोगों का सत्यापन नहीं किया जाता, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। प्रदर्शन में भाजपा जिला मंत्री महेश पाठक आदि थे।
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