The country is talking about 5G, the people of the frontier have the support of Nepali network
पिथौरागढ़। केंद्र सरकार ने अपने बजट 5जी सेवा शुरू करने की बात कही है। यह शिक्षा, संचार के क्षेत्र में काफी कारगर साबित हो सकती है लेकिन पिथौरागढ़ जिले के कई सीमावर्ती क्षेत्रों में आज भी लोगों को 2जी नेटवर्क तक उपलब्ध नहीं है। यहां के लोग आज भी नेपाल के सिम का उपयोग कर रहे हैं।
पिथौरागढ़ जिला चीन और नेपाल से लगा हुआ है। दोनों देशों का सीमांकन करने वाली काली नदी के किनारे तमाम गांव ऐसे हैं, जहां आज भी संचार की कोई सुविधा नहीं है। भारत-नेपाल सीमा पर पंचेश्वर से लेकर कालापानी तक दर्जनों गांवों में मोबाइल सिग्नल नहीं आते हैं। इन गांवों के लोग बातचीत के लिए नेपाली सिम का प्रयोग करते हैं।
धारचूला की दारमा और व्यास घाटी में कुछ समय पूर्व ही सेटेलाइट फोन सेवा शुरू की गई है। मुनस्यारी के साईपोलू, लेंगा, बुई, लीलम सहित कई गांव हैं जहां मोबाइल फोन काम नहीं करते हैं। यहां रहने वाले लोगों के लिए फाइव जी इंटरनेट सुविधा तो दूर बातचीत करने के लिए भी मीलों की पैदल दूरी तय कर मुख्यालयों में आना पड़ता है। बदहाल संचार सेवाओं के कारण कोरोना काल में गांवों में बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई से भी वंचित रहना पड़ा था।
बिजली गुल रहेगी तो कैसे होगी टीवी से पढ़ाई
पिथौरागढ़। सरकार की योजना पढ़ाई के लिए टीवी चैनल शुरू करने की भी है। वर्तमान में भी डीडी फ्री डिश में तमाम शैक्षिक चैनल चल रहे हैं लेकिन शहर से लेकर गांव तक बिजली नियमित नहीं रहती है। बार-बार बिजली की आंखमिचौली के अलावा कई बार दिनभर बिजली के दर्शन नहीं होते हैं। कई गांव ऐसे हैं जहां पर लो वोल्टेज की भी समस्या है। ऐसे में टीवी चैनलों का लाभ छात्रों को कैसे मिल पाएगा यह भी एक सवाल है।