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केंद्र ने मांगी नेपाल बार्डर के सीमा स्तंभों की रिपोर्ट

Tue, 27 Jan 2015 11:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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केंद्र सरकार ने राज्य से लगी भारत-नेपाल बार्डर के सीमा स्तंभों की रिपोर्ट मांगी है। जिलाधिकारी डा. दीपेंद्र चौधरी के निर्देश पर राजस्व, लोनिवि, एसएसबी, वन, खुफिया विभाग की संयुक्त टीम ने जिले से लगी नेपाल सीमा के स्तंभों का सर्वे शुरू कर दिया है।
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उत्तराखंड से लगी नेपाल की 250 किमी. सीमा ऊधमसिंह नगर, चंपावत और पिथौरागढ़ जिले से लगी हुई है। इसमें आवाजाही के सिर्फ दो वैधानिक मार्ग बनबसा और धारचूला में हैं।
 मार्ग से व्यापारिक और अन्य वैध गतिविधियों का संचालन होता है। धारचूला से लेकर टनकपुर के बीच तक काली (शारदा) दोनों देशों को विभाजित करती है, जबकि बूम से लेकर ऊधमसिंह नगर जिले से लगी सीमा में बार्डर को सीमांकित करने के लिए स्तंभ बने हैं। तहसीलदार हरी राम ने बताया कि राज्य से लगे बार्डर में 56 सीमा स्तंभ है। इनमें 38 चंपावत जिले में और 18 ऊधमसिंह नगर जिले में हैं। एसडीएम जेएस राठौर ने बताया कि दो दिन में निरीक्षण का कार्य पूरा कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जो जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जानी है।
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                                                                                                                                           दो गायब और तीन सीमा स्तंभ ढह चुके हैं
 तहसीलदार हरी राम ने बताया कि बूम से चंपावत जिले से लगे नेपाल बार्डर में 38 सीमा स्तंभ हैं। इनमें दो स्तंभ गायब है और तीन स्तंभ ढह गए हैं। उन्होंने बताया कि स्तंभ संख्या 811/3ए और 811/3 1983-84 से गायब हैं। जबकि शुरुआती प्वाइंट बूम का पहला स्तंभ संख्या 813/0ए, नेपाल के जिमुवा गांव के पास का 805/8 ए और भुजेला गांव के पास का सीमा स्तंभ संख्या 806/3 ढह गए हैं।
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