पिथौरागढ़। तापमान में बढ़ोतरी से मौसम में कई तरह के परिवर्तन आने लगे हैं। इस बदलाव के कारण जहां इस साल बारिश नहीं होने से जनवरी में मार्च की तपिश रही तो अब मार्च में सुबह-शाम जनवरी जैसी ठिठुरन महसूस हो रही है।
हिमालयी क्षेत्र में लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण पर्वतीय इलाकों में नवंबर से फरवरी तक कड़ाके की ठंड पड़ती है। पाला गिरने से जनवरी का महीना सबसे अधिक ठंडा रहता है। नवंबर 2022 से बारिश नहीं होने के कारण इस साल जनवरी में ही चटक धूप निकलने लगी थी।
जनवरी में जिले का औसत तापमान न्यूनतम 4.5 तो अधिकतम 17.4 रहा था। फरवरी भी पूरी तरह सूखा बीतने के कारण माह के आखिर तक तापमान में बढ़ोतरी होने से इस साल मुनस्यारी सहित अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों को छोड़कर घाटी क्षेत्रों में गर्म कपड़े भी जल्दी उतर गए थे।
पिछले वर्ष की तरह अलाव की आवश्यकता भी महसूस नहीं हुई। फरवरी में जिले का न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तो अधिकतम 19 डिग्री रहा। मार्च शुरू होते ही औसत तापमान में बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन ऊंची चोटियों पर चार दिनों से लगातार हिमपात और बारिश के कारण ठिठुरन बढ़ गई है। बुधवार को जिले का औसत तापमान न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 21 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
आसमान में बादल छाने से सुबह-शाम ठंड बढ़ गई है। मुनस्यारी सहित अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। जिला मुख्यालय में भी लोगों को दोबारा जैकेट सहित अन्य गर्म कपड़े निकालने पड़े हैं। मौसम विशेषज्ञ डॉ.चेतन भट्ट का कहना है कि वेस्टर्न डिर्स्टबेंस के कारण मौसम में इस तरह के बदलाव आ रहे हैं। इस साल शीतकाल में बारिश और बर्फबारी कम हुई है। हिमालयी क्षेत्र में हिमपात और बारिश से पर्वतीय इलाकों में सुबह-शाम ठंड रहेगी।
आसमान में दिन भर छाए रहे हल्के बादल
मुनस्यारी/पिथौरागढ़। आसमान में बुधवार सुबह से हल्के बादल छाए रहे। मुनस्यारी में दोपहर तक धूप निकली रही। इसके बाद बादल छा गए। इससे ठिठुरन बढ़ गई। हालांकि अब तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने के बाद लोगों ने अलाव और हीटर का सहारा लेना बंद कर दिया है। संवाद