डीडीहाट और कनालीछीना तहसील के गांवों को बेड़ीनाग से जोड़ने के लिए पीपलतड़ में रामगंगा में बना झूलापुल अब किसी बड़ी घटना का कारण न बन जाए। 1968 में बने झूलापुल की मरम्मत दस साल पहले हुई। इसके बाद न तो किसी न इस पुल की तरफ देखा और न मरम्मत की जरूरत समझी। पुल में लगे टिन गल गए हैं। सीमेंट उखड़ गया है। पुल में कई जगह छेद बन गए हैं। लोग जानवरों को इसलिए झूलापुल से नहीं ले जा रहे हैं क्योंकि उनका पांव इन छेदों में फंसने का खतरा रहता है।
झूलापुल से रमतड़, पीपलतड़, बरला, बेलकोट, आमखेत, कठनौला, असूर, द्वारी, सुअरखाल, गंगोरा, गुरना गांवों के लोग आवाजाही करते हैं। मुवानी तथा आसपास के गांवों से बेड़ीनाग पैदल जाने वाले भी इसी पुल से निकलते हैं। बेड़ीनाग के तरफ से मुवानी आने वालों के लिए पुल बेहद आसान है। पीपलतड़ के प्रधान चंदन सिंह कार्की ने बताया कि उन्होंने कई बार लोनिवि के अधिशासी अभियंता को पत्र लिख दिया है। अब तक यह तय नहीं है कि पुल की मरम्मत लोनिवि का डीडीहाट डिवीजन करेगा या बेड़ीनाग डिवीजन करेगा। यदि पुल की जल्दी मरम्मत नहीं की गई तो बड़ी घटना हो सकती है। लोगों ने टिनों को दबाने के लिए पत्थर रखे हैं। छेदों को भरने के लिए भी रोड़ी डाल रखी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुल की शीघ्र मरम्मत नहीं की गई तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। इसके लिए प्रशासन को अल्टीमेटम भी दे दिया गया है।