थल (पिथौरागढ़)। भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग से सेवानिवृत्त अपर महानिदेशक त्रिभुवन सिंह पांगती ने पिछले दिनों भू धंसाव की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों का भूगर्भीय सर्वेक्षण किया। उन्होंने संवेदनशील जगहों के लिए राज्य सरकार को टनल बनाए जाने का सुझाव दिया है।
पांगती ने ऋषिकेश, श्रीनगर, ग्वालदम, टनकपुर, थल, मुनस्यारी के भू धंसाव और सड़कों के भूगर्भीय सर्वेक्षण के लिए यात्रा की। उन्होंने बताया कि थल, मुनस्यारी क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से बहुत नाजुक है। कहा कि अपने सेवा काल में वर्ष 2014-15 में चार टनल के प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे जो भूगर्भीय दृष्टि से काफी उपयोगी थे। उन्होंने बताया कि इन सड़कों को अगर चौड़ा करने की कोशिश की गई तो भूस्खलन की संभावना बढ़ जाएगी। इससे इनका किसी प्रकार उपचार कराना संभव नहीं होगा।उन्होंने कहा कि उनकी ओर से सरकार को दिए गए सुझाव पर विचार-विमर्श करने की नितांत आवश्यकता है। कहा कि भारत माला परियोजना के अंतर्गत उक्त सड़क को शामिल किया गया है। इसकी अभी तक डीपीआर तैयार नहीं की गई हैं।
पांगती का कहना है कि बगैर बेहतर सड़कों के हम क्षेत्र के सतत विकास की कल्पना नहीं कर सकते हैं। उनका कहना है कि पिथौरागढ़ से टनकपुर की सड़क भूगर्भीय दृष्टिकोण से बेहतर है। कर्णप्रयाग-ग्वालदम सड़क भी अच्छी भूगर्भीय स्थित में बनाई गई है। उन्होंने बताया कि कुछ जगहों पर शॉटक्रिट, रॉक बोल्टिंग, जियो जूट और डिपनलिंक से उपचार करने की आवश्यकता है। ऋषिकेश से श्रीनगर तक की सड़क पर भू धंसाव काफी स्थानों पर देखा गया है। इसकी भूगर्भीय दशा काफी दयनीय है। इन सभी क्षेत्रों की विस्तृत भू तकनीकी सर्वेक्षण कराने की नितांत आवश्यकता है।