पिथौरागढ़। टिहरी रियासत के समय मलेथा गांव के माधो सिंह भंडारी ने राजशाही को आइना दिखाते हुए पहाड़ काटकर मलेथा गांव तक पानी पहुंचाया था। इसी योगदान पर आधारित नाटक को देखकर दर्शक रोमांचित हो गए। टिहरी रियासत 823 से 1949 तक रही। उसी दौरान मलेथा गांव में लोग सूखे, प्यास से परेशान थे। मलेथा गांव के माधो ने जब राजशाही से कोई मदद नहीं मिली तो गांववालों के सहयोग से सूखे, प्यास से गांव के लोगों को मुक्ति दिलाने का संकल्प लिया। मलेथा गांव तक पानी पहुंचाने का सपना साकार करने वाले माधो गढ़वाल की लोकगाथाओं में स्थान पा चुके थे।
माधो पर आधारित नाटक को भाव राग ताल नाट्य अकादमी ने तैयार किया। नाटक की पटकथा डॉ. अनिल कार्की ने लिखी। संगीत संरचना धीरज कुमार ने की। नाटक की परिकल्पना, निर्देशन कैलाश कुमार ने किया। निर्देशक कैलाश कुमार ने बताया कि उत्तराखंड में सामाजिक आंदोलनों से जुड़े कई नायक हुए थे। इनमें से माधो भी एक थे। उन्होंने कहा कि समाज को बदलने के लिए आज भी ऐसी ही संकल्प शक्ति की जरूरत है। यदि लोग संगठित हों और उनको सही नेतृत्व मिल जाए तो वह व्यवस्था को बदल सकते हैं। नाटक यही संदेश देता है।
यहां राजकीय संग्रहालय के प्रेक्षागृह में मंचित इस नाटक का सह निर्देशन प्रीति रावत ने किया। नाटक में रोहित यादव ने माधो सिंह की भूमिका निभाई। नानू बिष्ट ने मंच संचालन किया। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से इस नाटक का मंचन किया गया। डिगरदीप, दीपा बिष्ट, अनीता बिटालू, गीता वर्मा, राजकिशोर उस्ताद, पवन सिंह भंडारी, दीपक मंडल, सूरज सिंह, तरुण वर्मा, अक्षय पंत, मनोज थापा, प्रीति रावत, गणेश भट्ट ने भूमिका निभाई।