पिथौरागढ़/डीडीहाट/अस्कोट/मुनस्यारी/टनकपुर। वड्डा की रामलीला में दशरथ मरण की लीला का मंचन किया गया। डीडीहाट और अस्कोट में रामलीला प्रारंभ हो गई है। मुनस्यारी की रामलीला में लक्ष्मण शक्ति का मंचन हुआ। वड्डा की रामलीला में राम वनवास के बाद राजा दशरथ की मृत्यु, भरत के चित्रकूट से लौटने की लीला का मंचन किया गया।
नंदीग्राम से लौटने के बाद भरत माता कैकई पर क्रोधित होकर कहते हैं ‘तेरे मन में ऐसी कुमति बसी क्यों राम को वन जो दीन्हा’। रामलीला में महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 संतोषी माता ने रामकथा के कई प्रसंग सुनाए। हारमोनियम में मनोज सिंह मतवाल, तबले में हरीश राम संगत दे रहे हैं। मुख्य अतिथि खंड विकास अधिकारी श्याम चंद, विशिष्ट अतिथि थानाध्यक्ष नारायण सिंह थे।
डीडीहाट में नारद मोह के साथ ही रावण, कुंभकर्ण, विभीषण की तपस्या का मंचन किया गया। रावण के कैलास पर्वत उठाने का दृश्य को बेहतरीन ढंग से मंचित किया गया। राजा दशरथ पुत्रेष्टि यज्ञ करते हैं। पहले दिन राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न के जन्म तक की लीला हुई। रावण की भूमिका में प्रकाश बोरा, नारद संजू पंत थे।
अस्कोट की रामलीला में की शुरुआत पंडित नारायण दत्त पंत ने गणेश पूजा से की। पहले दिन अस्कोट में नटी सूत्रधार ने नाटक की भूमिका रखी। देवगण धरती पर अवतार लेने के लिए भगवान विष्णु की प्रार्थना करते हैं। पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी ने रामलीला का उद्घाटन किया। रामलीला की स्मारिका का विमोचन किया गया।
स्मारिका का संपादन शिक्षक गोविंद सिंह भंडारी ने किया है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष होशियार सिंह पाल, भीम सिंह भंडारी, विक्रम पाल, तनुज पाल, आन सिंह पाल आदि रामलीला का संचालन कर रहे हैं। मुनस्यारी की रामलीला में लक्ष्मण शक्ति का मंचन किया गया। संजीवनी बूटी लाने के दौरान हनुमान को तार के जरिए उड़ता हुआ दिखाया गया। इसके लिए रामलीला कमेटी कई दिनों से मेहनत कर रही थी।
टनकपुर (चंपावत)। क्षेत्र में जगह-जगह रामलीला का मंचन जारी है। आदर्श रामलीला कमेटी की ओर से गैड़ाखाली में चल रही रामलीला में अक्षय कुमार का वध, लक्ष्मण शक्ति तक की लीला का मंचन किया गया। इस दौरान मंचन में राम के पात्र अनिल सिंह, मेेघनाद के पात्र विमल पंत, विभीषण के पात्र अंबादत्त, रावण के पात्र अभिनय अक्षय कुमार ने किया। विधायक हेमेश खर्कवाल ने मंच निर्माण के लिए डेढ़ लाख रुपए देने की घोषणा की है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष नारायण सिंह महर ने अतिथियों का स्वागत किया। उधर, उचौलीगोठ में भी रामलीला जारी है।
अस्कोट (पिथौरगढ़)। चीन और नेपालकि सीमा में स्थित अस्कोट में रामलीलकि नींव अस्कोट रियासताक रजवाड़नलि डाली। ये रामलीलक इतिहास 145 साल बटि 176 साल पुराण मानी जां। अस्कोट में रामलील हमेशा शारदीय नवरात्र समाप्ति बाद दीपावलीक नजदीक करी जांछि। ये सालकि रामलील रविवार 16 अक्तूबर बटि शुरू हैगेछ।
मानी जांछ कि अस्कोट रियासताक राज बहादुर पाल ज्यूक शासनकाल (1828-1871) में अस्कोटकि रामलीलाकि शुरुआत भैछ। रामलील शुरू हुणाक एकदम सही तिथि, सालकि जानकारी नैहाति। यदि 1840 बटि ले रामलील शुरू भैछ तो अस्कोटकि रामलील 176वें साल में प्रवेश कर गे। अंतिम वर्ष 1871 बटि गणना करछा तो 145 साल पुराण अस्कोटकि रामलीलाक इतिहास हुंछ। 95 वर्षीय लक्ष्मण पाल बतूनन कि शुरुआत में तिलाक तेलाक बात जगा भेर रामलील में उज्याव करी जांछि।
डीडिहाट, बरम, बंगापानी, जौलजीबी, सतगड़, कनालिछिन समेत तमाम जागन बटि लोग अस्कोटकि रामलिल देखणी ऊंछि। लक्ष्मण पाल ज्यू अपण बौज्यू (पिता) स्वर्गीय जगत सिंह पाल थैं सुणी बतकौ बतूनन कि पैली रामलीलाक सार खर्च पाल राजा उठूंछि। राजकोष बटि रामलीलाकि व्यवस्था हुंछि। लोग श्रद्धाभावलि रामलील में शिरकत करछीं।
40 साल पैली अस्कोटकि रामलील में अंगद-रावण संवादकि जीवंत प्रस्तुति हुंछि। बुजुर्ग लोग बतूनन कि रावणकि भूमिका में देवल गौंक अर्जुन पाल और अंगदकि भूमिका में गदालि गौंक हर सिंह धामी हुंछि। इन द्विये कलाकारनलि कई साल तक अंगद-रावणाक अभिनय करौ। आब द्विये कलाकार ये दुनि में नैहांतिन लेकिन ये जोड़ी लोग आज लै याद करनन।