भारत-नेपाल सीमा पर स्थित झूलाघाट कस्बे के लोग पंचेश्वर बांध निर्माण की तैयारी शुरू होने के बाद से भारी आशंका में हैं। यदि बांध बनता है तो झूलाघाट भी डूब क्षेत्र में आ जाएगा और कस्बे का अस्तित्व तो समाप्त होगा ही, साथ में इस इलाके में प्रस्तावित बड़ी परियोजनाएं भी अधर में लटक जाएंगी।
पिछले साल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल का दौरा किया था तब पंचेश्वर बांध के निर्माण का ऐलान किया था। यदि पंचेश्वर बांध बनता है तो झूलाघाट सबसे पहले उसके डूब क्षेत्र में आ जाएगा। हालांकि पिछले 52 वर्षों से पंचेश्वर बांध निर्माण की चर्चा चल रही है। कभी नेपाल से तो कभी भारत से बांध के विरोध में आवाजें उठती रही।
अब यदि पंचेश्वर बांध बनता है तो सबसे पहले महाकाली के किनारे प्रस्तावित टनकपुर-जौलजीबी रेल लाइन, सड़क का काम अटक जाएगा। व्यापार संघ के जिला उपाध्यक्ष दुर्गा दत्त शर्मा का कहना है कि बड़ी बांध परियोजनाओं से सबसे बड़ी समस्या विस्थापन की आती है। लोगों को अपनी मातृभूमि छोड़नी पड़ेगी।
वह कहते हैं कि बांध का निर्माण किसी भी नजरिए से ठीक नहीं है। यदि बिजली परियोजना के लिए बांध का निर्माण जरूरी हो तो छोटे स्तर के बांध बनाए जाएं। ताकि उनसे डूब क्षेत्र कम आए। पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा पंचेश्वर बांध का विरोध करते हैं। वह कहते हैं कि बांध बनने से रेल लाइन बनाने की योजना समाप्त हो जाएगी।
नेपाल में भारत के राजदूत रंजीत रे ने पिछले महीने यहां का दौरा किया था। उस समय उन्होंने पंचेश्वर बांध परियोजना और भारत-नेपाल को जोड़ने के लिए तीन मोटर पुलों और छह झूलापुलों के निर्माण की बात भी कही थी लेकिन जब बांध परियोजना बनेगी तो पुलों का निर्माण कैसे होगा।