पिथौरागढ़ में शहीद संजय चंद के तोली गांव का घर।
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मूनाकोट(पिथौरागढ़)। मूनाकोट ब्लॉक के दूरस्थ गांव तोली में पैदा हुए संजय बचपन से ही होनहार थे। पिता भरत चंद के प्राइवेट नौकरी में होने के कारण संजय बेहद गरीबी ओर बेरोजगारी का दंश झेलते हुए पले बढ़े। प्राइमरी शिक्षा तोली में लेने के बाद हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज बड़ाबे से पूरी की। संजय बचपन से ही परिजनों से सेना में जाने की जिद करते थे।
सेना में भर्ती होने के लिए वह सुबह जल्दी उठकर घर से निकल जाता था। रोज सुबह शाम सेना में भर्ती होने के लिए शारीरिक परिश्रम भी करते थे। नवंबर 2008 में चंपावत के लोहाघाट में हुई सेना की भर्ती में उन्होंने दौड़ और शारीरिक दक्षता परीक्षा पास कर ली। मेडिकल और लिखित परीक्षा पास करने के बाद संजय सेना में भर्ती हो गए। शहीद के चाचा दौलत चंद ने बताया कि संजय देश की रक्षा में दुश्मनों से संघर्ष करते हुए उग्रवादियों की गोली का शिकार हो गया है। शहीद संजय के रिश्तेदार शमशेर चंद ने बताया कि छोटे भाई ललित के गोरखा रेजिमेंट में भर्ती होने के बाद वह बहुत खुश हुआ। करीब दो महीने पहले ही घर आया था। गांव के लोगों के साथ उसका काफी अच्छा व्यवहार था। जिस घर में वह जाता था वहां के लोग खुश हो जाते थे। हमें क्या पता था कि वह उसकी गांव की अंतिम यात्रा होगी।
गांव में छाया मातम
मूनाकोट। शहीद के गांव तोली में मातम छाया हुआ है। हर कोई शहीद के घर के परिवार को ढाढ़स बंधाने के लिए उनके पास जाना चाहता है। मगर परिवार के लोगों की चीखपुकार सुनकर वे घर के अंदर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। जवान को जानने वालों को यकीन नहीं हो रहा कि उनका संजय उनके बीच नहीं रहा। घर के अंदर जवान की मौत के बाद कोहराम मचा है तो घर के बाहर लोग शांत बैठे हैं। (संवाद)