अस्कोट की रामलीला में हनुमान-रावण संवाद
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अस्कोट की रामलीला में लंका दहन का मंचन किया गया। इस दौरान रामलीला के पुराने कलाकारों को रामलीला कमेटी ने सम्मानित किया।
रामलीला की शुरुआत सुग्रीव के सेना सहित भगवान राम के पास पहुंचने से हुई। इसके बाद भगवान राम हनुमान को सीता का पता लगाने के लिए लंका भेजते हैं। भगवान राम हनुमान से कहते हैं ‘संदेशा ये पवनसुत तू सिया प्यारी से कह देना, विरह में उसके व्याकुल हूं, व्यथा मेरी जता देना’। हनुमान लंका जाकर सीता माता को प्रभु राम की कुशलता का संदेश देते हुए कहते हैं ‘मातु कुशल प्रभु अनुज समेता, तव दुख दुखी सुकृपा निकेता, जनि जननी मानहूं जिय ऊना, तुम ते प्रेम राम कैं दूना’। हनुमान माता सीता की आज्ञा लेकर फल खाते हैं कि राक्षस उन पर हमला करते हैं।
हनुमान रावण के पुत्र अक्षय कुमार समेत तमाम राक्षसों को मार डालते हैं। रावण का पुत्र मेघनाद हनुमान को बंदी बनाकर रावण दरबार ले जाता है। वहां रावण के आदेश पर हनुमान की पूंछ में आग लगा दी जाती है। हनुमान लंका नगरी को जला डालते हैं। इस दौरान 75 वर्ष से ऊपर के कलाकार ईश्वरीदत्त पंत, वासुदेव जोशी, पुरुषोत्तम उपाध्याय, महेंद्र पाल, दयाकृष्ण पंत आदि को रामलीला कमेटी के अध्यक्ष होशियार सिंह पाल ने सम्मानित किया। मुख्य अतिथि खोलिया गांव के ग्राम प्रधान किशन राम थे।