लोहाघाट (चंपावत)। रोडवेज डिपो में बसों की कमी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। डिपो को अभी कम से कम 15 नई बसों की जरूरत है। बसों की कमी के कारण कई रूटों पर नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में यात्रियों को निजी वाहनों और टैक्सियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग यात्रियों को हो रही है। बस उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें घंटों टैक्सी भरने का इंतजार करना पड़ता है, जबकि रोडवेज बसों का समय निर्धारित होता है।
लोहाघाट डिपो में वर्तमान में 27 बसों का बेड़ा है। इनमें करीब पांच बसें पर्वतीय क्षेत्र के निर्धारित मानक को पूरा करने की कगार पर हैं। मानक पूरा कर चुकी पुरानी बसों को क्षेत्रीय कार्यालय टनकपुर भेजे जाने से डिपो में बसों की संख्या और कम हो गई है। करीब एक दशक पहले डिपो में 40 से अधिक बसें थीं।
बसों की कमी के चलते करीब चार महीने से बरेली और दो महीने से काशीपुर की एक-एक सेवा का संचालन बंद है। इससे इन मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डिपो से फरीदाबाद, दिल्ली, गुरुग्राम, देहरादून, बरेली, पोंटासाहिब, नैनीताल और हल्द्वानी के लिए बस सेवाएं संचालित होती हैं।
बुजुर्गों, दिव्यांगों और गरीब लोगों के लिए रोडवेज की बसें बड़ा सहारा बनती हैं। लोहाघाट डिपो में बसों की कमी से कई रूटों पर संचालन न होने से इनका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रहलाद सिंह अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, बाराकोट
-
लोहाघाट से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली, बरेली आदि स्थानों में सामान खरीदने के लिए जाते हैं। बसें न मिलने के कारण व्यापारियों को टैक्सियों में अधिक किराया देकर जाने को मजबूर होना पड़ता है।
सतीश मुरारी, पूर्व व्यापार संघ कोषाध्यक्ष लोहाघाट
-
रोडवेज को ग्रामीण क्षेत्र के लिए भी बसों का संचालन करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में बस न चलने से लोगों को सरकार की निशुल्क बस सेवा का लाभ नहीं मिल पाता। लोग टैक्सी में मनमाना किराया देकर यात्रा करने को मजबूर हैं।
संजय जोशी, प्रधान नौमाना
-
डिपो में वर्तमान में 27 बसें हैं। बसों की कमी से बरेली और काशीपुर के लिए सेवा संचालित नहीं हो पा रही है। पांच बसें पर्वतीय क्षेत्र का मानक पूरा करने की कगार में हैं। डिपो को और कम से कम 15 नई बसों की जरूरत है।-जगदीश नारायण, एसएसआई रोडवेज, लोहाघाट