सीपू पास, यहीं होकर धारचूला के लिए निकला ट्रैकरों का दल
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नौ दिन में सात पड़ावों को पार कर और 5630 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सीपू पास होते हुए मुनस्यारी से धारचूला जाने वाले नए ट्रैकिंग रूट का पता लगाकर युवाओं का दल लौट आया है। सात सदस्यीय इस ट्रैकिंग दल में महाराष्ट्र, केरल, आंध्रप्रदेश और दिल्ली के युवा शामिल हैं।
दल में शामिल विकास, तिनबा, रोहित, रक्षित, प्रथमेश आदि का दावा है कि मुनस्यारी से धारचूला पहुंचने के लिए इस नए ट्रैकिंग रूट की खोज पहली बार हुई है। ट्रैकिंग रूट में दल को 17 बुग्याल, तीन झील, कई दुर्लभ पक्षियों के दर्शन हुए। उनका कहना है कि इस ट्रैकिंग रूट में वह सभी कुछ है जो पर्यटकों और ट्रैकरों को चाहिए, लेकिन कमी यह है कि अधिकांश स्थानों पर ट्रैकिंग रूट नहीं हैं। जंगलों से भटककर आगे बढ़ना होता है। दल के सदस्यों ने पातो, लिंगुरानी, रालम, किलतम, यमचर, सीपू, तानदु, नागलिंग होते हुए तवाघाट के रास्ते मुनस्यारी तक का सफर पूरा किया।
यह दल 11 सितंबर को यहां से रवाना हुआ था। दल के सदस्यों को पर्वतारोही वीरेंद्र बुग्याल ने हरी झंडी दिखाई थी। दल के सदस्यों ने बताया कि इस रूट पर कई स्थानों पर बर्फ मौजूद है। सीपू पास में तो अच्छी खासी बर्फ है। रालम से आगे दल को कई दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। इसकी वजह यह थी ट्रैकिंग रूट नहीं बना होने से कई स्थानों पर जंगलों में भटकना पड़ा। दल के सदस्य दिल्ली लौट गए हैं।