धान की फसल बचाने को खुद कर रहे नहर की मरम्मत
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क्वीटी ग्राम पंचायत में नहरों की मरम्मत न होने से गेहूं की फसल चौपट हो गई। धान की फसल को बचाने के लिए किसानों ने अपने स्तर से प्रयास शुरू कर दिए हैं। तीन नहरों से 29 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलों की सिंचाई होती थी।
ग्राम पंचायत क्वीटी में माजकोट से सांगड़ी तक 3 किमी हिस्से में बनी नहर से 9 हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होती थी। सैमलीगाड़-क्वीटी दो किमी नहर से 10 हेक्टेयर भूमि को पानी मिलता था। धौलगाड़ा से मोड़म तक बनी नहर भी 10 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करती थी। जुलाई 2016 की बरसात में तीनों नहरें क्षतिग्रस्त हो गई। प्रधान नीमा देवी कहती हैं कि नहरों में पानी न चलने से गेहूं की फसल प्रभावित हुई। अब धान की खेती पर खतरा मंडरा रहा है। प्रधान ने बताया कि इन नहरों से 5 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले लीची के बागों की भी सिंचाई होती थी। लीची की सिंचाई भी नहीं हो पा रही है।
उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग नहरों की मरम्मत के लिए धन न होने की बात कह रहा है। धान की फसल को बचाने के लिए ग्राम पंचायत के लोगों ने स्वयं नहरों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। प्लास्टिक के पाइप, टिन के चादर डालकर नहरों में पानी चलाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधान कहती हैं सिंचाई विभाग और सरकार की उदासीनता से लोग निराश हैं और लोगों में गुस्सा है।
आपदा मद से नहरों की मरम्मत के लिए धन मांगा गया था, जो अब तक नहीं मिला है। मरम्मत मद का पैसा भी अब नहीं आता है। धन मिलने पर नहरों की मरम्मत की जाएगी।
पीके दीक्षित अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग पिथौरागढ़