पिथौरागढ़। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले रोडवेज कर्मचारी इन दिनों गंभीर आर्थिक और प्रशासनिक संकट से जूझ रहे हैं। पिथौरागढ़ डिपो के कर्मचारियों को पिछले तीन महीने से वेतन न मिलने के कारण उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बिना वेतन के काम करने को मजबूर कर्मचारी मानसिक तनाव में हैं जिसका सीधा असर उनकी कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है।
दूसरी ओर, डिपो में टायरों और जरूरी सामान के अभाव में करीब आधा दर्जन बसें वर्कशॉप में खड़ी हो गई हैं। सामान की यह किल्लत अब हर महीने की आम समस्या बन चुकी हैै जिसके कारण कई प्रमुख रूटों पर बसों का संचालन ठप पड़ गया है। वर्तमान में हरिद्वार और देहरादून के लिए एक-एक सेवा के साथ-साथ धरमघर और पांगला जैसी महत्वपूर्ण ग्रामीण सेवाएं भी बाधित चल रही हैं।
बार-बार मांग किए जाने के बावजूद डिपो को समय पर टायर और अन्य स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। परिवहन व्यवस्था की इस बदहाली का खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें समय पर बसें न मिलने से भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
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तीन मंडलों में प्रबंधक तकनीकी का पद रिक्त
पिथौरागढ़। उत्तराखंड परिवहन निगम में ऊपर से निचले स्तर तक कई पद रिक्त चल रहे हैं। मुख्यालय में महाप्रबंधक तकनीकी का पद रिक्त है तो टनकपुर, काठगोदाम और देहरादून मंडल में मंडलीय प्रबंधक तकनीकी का पद भी खाली है। इसके चलते परिवहन निगम में तकनीकी मामलों की समस्याएं सुलझने में बहुत वक्त लग रहा है या सुलझ ही नहीं रही हैं। इसके अलावा पूरे प्रदेश में जूनियर फोरमैन के करीब चार दर्जन पद रिक्त हैं। हाल यह हैं कि जूनियर फोरमैन का ग्रेड पे 2800 रुपये जबकि पद में उनसे नीचे के कर्मचारी 4200 रुपये ग्रेड पे ले रहे हैं। ऐसे में जूनियर फोरमैन के पद पर कोई आना नहीं चाहता। निगम उनको जूनियर फोरमैन के पदों पर नहीं बिठा पा रहा और न ही उनकी तनख्वाह कम कर पा रहा है। ऐसे में कर्मचारी भी जूनियर फोरमैन का पद संभालने के कतई इच्छुक नहीं हैं।
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टायरों और अन्य सामान पिछले दिनों आए हैं। फिर से डिमांड भेजी गई है जो एक-दो दिन में उपलब्ध हो जाएगी। कार्मिकों का वेतन भी मिलने की उम्मीद है। तीन-चार बसें अन्य वजहों से खड़ी हैं।
-रविशेखर कापड़ी, एआरएम