पिथौरागढ़। मुनस्यारी के उच्च हिमालयी क्षेत्र मिलम तक अगले साल सड़क पहुंचने से पर्यटकों का ग्लेशियर तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इससे क्षेत्र में पर्यटन संबंधी गतिविधियां बढ़ेंगी। यहां उत्पादित जड़ी-बूटियों को भी बाजार मिल सकेगा।
मुनस्यारी से 64 किमी की दूरी पर स्थित मिलम गांव समुद्र तल से करीब 11,400 फुट की ऊंचाई पर बसा है। यह गांव कभी एशिया के बड़े गांवों में शामिल रहा है। तब यह तिब्बती व्यापार का भी प्रमुख केंद्र रहा लेकिन वर्ष 1962 में चीन से युद्ध के बाद तिब्बत के साथ व्यापार खत्म हो गया। तब से वहां जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया।
वर्ष 1994 में मिलम को आम लोगों की आवाजाही के लिए खोला गया लेकिन वहां जाने के लिए पास बनाना पड़ता था। अब मिलम तक पर्यटक सीधे जा सकते हैं। मिलम ग्लेशियर भी वहीं स्थित है। इस क्षेत्र का अध्ययन करने के लिए कई शोधार्थी भी आते रहते हैं। वहां बीआरओ सड़क बनवा रहा है। इस मार्ग पर 64 किमी पर रेलगाड़ी नामक जगह से बुगडियार तक छह किमी लंबी सड़क बननी बाकी है। यह कार्य अगले साल तक पूरा करने का लक्ष्य है।
धापा से बुगडियार तक 24 किमी सड़क एबीसीआई कंपनी कर रही है। करीब 18 किमी लंबी सड़क पर डामरीकरण हो चुका है। माइग्रेशन वाले इस गांव में ग्रामीण अप्रैल से अक्तूबर तक खेतीबाड़ी करते हैं।
वहां जंबू, गंदरायण, आलू, सत्तू, कुटकी आदि प्रचुर मात्रा में होता है। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर इस क्षेत्र में कई पर्यटक ट्रैकिंग के लिए भी आते हैं। संवाद
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सड़क बनने से इन गांवों को होगा लाभ
पिथौरागढ़। मुनस्यारी के जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने बताया कि मिलम तक सड़क बनने से लास्पा, मर्तोली, बुर्फू, बिल्जू, रिलकोट आदि गांवों में रहने वालों को प्रत्यक्ष लाभ होगा।
खिलांच, टोला, मापा, गनघर, पांछू गांवों में रहने वालों को भी फायदा मिलेगा। बताया कि सड़क बनने के बाद यह क्षेत्र प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा। संवाद