पिथौरागढ़। चीन सीमा पर स्थित व्यास घाटी के लिपुलेख तक सड़क पहुंच चुकी है लेकिन आजादी के 76 साल बाद भी कनार गांव में आज तक सड़क को स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
धारचूला विधानसभा क्षेत्र का कनार गांव आठ हजार फुट की ऊंचाई पर बसा है। गांव में लगभग एक हजार की आबादी रहती है। वर्षों से ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं लेकिन आज तक गांव के लिए सड़क नहीं बन सकी है। लोगों को पैदल ही 16 किमी की दूरी तय करनी होती है। खाद्यान्न, जरूरी सामान भी पीठ पर ढोना पड़ता है। जिस मार्ग से आवाजाही होती है वह जिला पंचायत का पैदल मार्ग भी लंबे समय से बदहाल है।
इस मार्ग से भी ग्रामीणों को जान हथेली पर रखकर आवागमन करना पड़ता है। पूर्व में दो लोगों की रास्ते से गिरकर मौत हो चुकी है। घायलों, गंभीर रोगियों या प्रसव पीड़िता को इलाज के लिए बरम पहुंचाना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता है। ग्रामीण मरीज या घायल को डोली से बरम तक पहुंचाते हैं।
यह मार्ग पहले अस्कोट अभयारंण्य के अंतर्गत आता था लेकिन 10 साल पहले यह गांव अभयारण्य से बाहर हो चुका है। अभयारण्य से बाहर होने के बाद भी इस गांव के लिए सड़क सपना बनी है। हालांकि अब इस सड़क को मुख्यमंत्री घोषणा में भी शामिल कर लिया गया है। इससे सड़क बनने की उम्मीद है लेकिन वन भूमि हस्तांतरण की बाधा दूर नहीं होने से सड़क निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है। इधर ग्रामीणों का कहना है कि दारमा घाटी के लगभग अधिकांश गांवों तक वाहनों की पहुंच हो चुकी है। बेहद दुर्गम कहा जाने वाले मुनस्यारी का मल्ला जोहार का मिलम इलाका भी अगले एक माह में सड़क सुविधा से जुड़ जाएगा पर जाने किस दिन हमारा गांव सड़क सुविधा से जुड़ेगा।
कोट
शासन से सड़क को स्वीकृति मिली है। वन भूमि हस्तांतरण नहीं होने से परेशानी हो रही है। वन निगम अध्यक्ष रहने के दौरान मैंने सड़क निर्माण के लिए 3.50 करोड़ की धनराशि दी थी। आधा किमी सड़क की कटिंग भी हो चुकी थी। भाजपा की सरकार आते ही धनराशि वापस कर दी गई। कनार के लिए सड़क निर्माण प्राथमिकता में रखा गया है। जल्द ही सड़क की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करूंगा। - हरीश धामी, विधायक धारचूला।
कनार के जीत सिंह ने डोली में ही तड़प-तड़पकर कर तोड़ दिया दम
बंगापानी (पिथौरागढ़)। सड़क और अस्पताल जैसी सुविधाओं के अभाव में कनार गांव के एक ग्रामीण की मौत हो गई। अस्पताल पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर भी नहीं पहुंचा। इलाज के लिए अस्पताल लाते समय ग्रामीण ने कुर्सी की बनी डोली पर ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
बंगापानी तहसील के कनार गांव के लिए सड़क की सुविधा नहीं है। यहां के लोगों को 16 किमी की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है। ग्राम सभा कनार के जीत सिंह परिहार पुत्र कल्याण सिंह (53) दो दिन पूर्व कीड़ाजड़ी खोजने के लिए गांव की चोटी पर स्थित बुग्याल में गए हुए थे। वहां उनका स्वास्थ्य खराब हो गया। इसके बाद वह बमुश्किल घर पहुंचे। घर पहुंचने के बाद उनको तेज बुखार आने के साथ ही पेशाब बंद हो गई।
अधिकांश ग्रामीणों के कीड़ाजड़ी निकालने के लिए उच्च हिमालयी क्षेत्र में जाने के कारण उन्हें डोली से बरम तक पहुंचाने के लिए भी गांव में पर्याप्त लोग नहीं थे। सूचना पर ब्लाॅक प्रमुख धन सिंह धामी ने प्रशासन से वार्ता की लेकिन शाम चार बजे तक देहरादून से हेलीकॉप्टर नहीं आया।
दर्द से तड़पते जीत सिंह की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने उन्हें डोली से बरम तक पहुंचाने का निर्णय लिया लेकिन डेढ़ किमी की दूरी पर जीत सिंह की हालत और बिगड़ने से वह तड़पने लगे। इसके कुछ ही देर बाद शाम करीब पांच बजे जीत सिंह ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। जीत सिंह की मौत से ग्रामीणों में शोक है। ग्रामीण कृष्णा परिहार ने बताया कि जीत सिंह की पेशाब बंद हो गई थी जिससे इससे उनके पेट में सूजन आ गई थी। यदि हेलीकॉप्टर आ जाता तो उनकी जान बच सकती थी।