मुवानी की रामलीला में दशरथ मरण से पहले श्रवण कुमार नाटक का शानदार मंचन किया गया।
राम वनवास के बाद सैय्या पर लेटे महाराजा दशरथ युवावस्था में मिले श्राप की बात रानियों को बताते हैं। बताते हैं कि एक दिन वह जंगल में आखेट पर थे। नदी में किसी जानवर के पानी पीने की आवाज आई, तो उन्होंने मृग समझकर शब्दभेदी बाण चला दिया। श्रवण अपने माता-पिता को यात्रा पर ले जा रहे ऋषिकुमार श्रवण कुमार को लग जाता है। श्रवण कुमार के चिल्लाने पर राजा दशरथ वहां पहुंचे तो श्रवण कुमार ने पास ही में अपने माता-पिता के मौजूद होने की बात उन्हें बताई और प्राण त्याग दिए।
राजा दशरथ जब श्रवण कुमार के माता-पिता के पास पहुंचे तो, श्रवण कुमार की मौत की बात सुनकर क्रोधित हो जाते हैं और राजा दशरथ को पुत्र वियोग में प्राण त्यागने का श्राप दे देकर अपने प्राण त्याग देते हैं। यह वृतांत सुनाते-सुनाते मंत्री सुमंत राम, लक्ष्मण, सीता को वन में छोड़कर आ जाते हैं, राम, लक्ष्मण, सीता के वन जाने का समाचार सुनकर दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं। युवा दशरथ की भूमिका में ललित शौर्य, श्रवण कुमार की भूमिका में संजय ऐरी थे। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जगत सिंह मेहता ने सहयोग के लिए सभी का आभार जताया।