जिले के कई स्थानों पर अभी भी रामलीला की धूम मची हुई है। जिला मुख्यालय के नजदीक वड्डा की रामलीला में सीता हरण, रावण जटायु संवाद, जटायु वध, राम सबरी मिलाप, राम सुग्रीव मिलाप और हनुमान मिलन तक का मंचन किया गया। रामलीला में लोगों की भीड़ उमड़ी रही।
अस्कोट। यहां की रामलीला में सुमंत की वापसी, राम के वियोग में दशरथ का प्राण त्यागने का मंचन हुआ। दशरथ प्राण त्यागते हुए कौशल्या से कहते हैं ‘अब तो हम दमदम चला, रहने को प्यारी तन नहीं। भरत और शत्रुघ्न को पिता के प्राण त्यागने की खबर मिलने पर वह ननिहाल से लौटते हैं। भरत माता कैकयी से कहते हैं ‘ये क्या किया तैने पापिन महाचारी, राम-लखन-सिया वन को पठा के, कर दिया सगर कुटुंब दुखारी’। साथ ही शत्रुघ्न का मंथरा को लात मारने तक का मंचन हुआ। भरत की भूमिका में गौरव पाल, शत्रुघ्न की भूमिका में चंचल सिंह भंडारी, कैकयी में योगेश बसेड़ा, मंथरा में गणेश कुंवर, सुमंत में सुंदर सिंह बिष्ट, दशरथ की भूमिका में वीरजंग पाल थे। मुख्य अतिथि रजवार भानुराज सिंह पाल और विशिष्ट अतिथि हर्ष बहादुर पाल थे।
झूलाघाट। झूलाघाट में हुई रामलीला में अंगद और रावण संवाद का मंचन हुआ। रामलीला का आनंद लेने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचे थे।