पिथौरागढ़। सोरगढ़ की रामलीला रावण कुंभकर्ण के पास जाकर उसे जगाने का प्रयास करने से शुरू हुई। कुंभकर्ण के जागने के बाद रावण से हर प्रकार जगाने का प्रयास करता है। कुंभकरण के जागने के बाद रावण से इस प्रकार जगाने का कारण पूछता है। रावण के बताने के बाद कुंभकर्ण रावण के कृत्य की निंदा करता है। उसे एहसास हो जाता है कि अब राक्षस कुल का विनाश निश्चित है और राम से युद्ध करने जाता है और राम के हाथों मारा जाता है।
कुंभकर्ण के मारे जाने के बाद मेघनाद के युद्ध में जाने, मेघनाद वध, सुलोचना सती, रावण वध, राम विजय, सीता की अग्नि परीक्षा और विभीषण का राज्याभिषेक तक की लाला का मंचन किया किया। रामलीला कमेटी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह माहरा ने कोविड के बाद 125वें रामलीला मंचन को सफल बनाने के लिए सभी का आभार जताया।
दशहरे से थल में भी रामलीला शुरू
थल (पिथौरागढ़)। वियजदशमी पर शुक्रवार शाम यहां रामलीला शुरू हुई। मंचन से पूर्व उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय हेवी इलेक्ट्रॉनिक्स (बीएचईएल) वाराणसी के उपमहाप्रबंधक हीरा सिंह पांगती और विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ व्यापारी प्रताप सिंह पंचपाल ने किया। रामलीला के पहले दिन नटी के पात्र राजेंद्र कुमार, सूत्रधार के रूप में मनोहर आर्या ने जीवंत अभिनय किया। हिमालय में रावण, कुंभकर्ण, विभीषण के घोर तप से शिवजी को प्रसन्न कर मनचाहा वर मांगने, नारद मुनि के रावण को मनचाहे वरदान की परीक्षा लेने की सलाह पर रावण के कैलाश पर्वत उठाने की रोचक प्रस्तुति पेश की गई।
मुनि की कुटिलता से कुपित रावण देवगणों से कर वसूलने के दृश्य के साथ राजा दशरथ के यज्ञ से लेकर रामजन्म तक लीला की शानदार मंचन किया किया। इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष दिनेश चंद्र पाठक, अर्जुन सिंह रावत, दान सिंह बिष्ट, मनोहर सिंह सत्याल, उक्रांद नेता सलीम अहमद, पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष गोविंद भट्ट, जिला व्यापार मंडल उपाध्यक्ष भूपेंद्र जंगपांगी, व्यापार मंडल अध्यक्ष बलवंत सत्याल, उपाध्यक्ष अनिल कार्की आदि रहे।
तीन साल की उम्र से रामलीला की शान हैं दीपक
पिथौरागढ़। दीपक तिवारी तीन साल की उम्र से राम बन रहे हैं। उन्होंने राम के अभिनय से दर्शकों के दिलों में ऐसी छवि बनाई कि लोग उन्हें राम के नाम से ही पुकारते हैं। उन्होंने टकाना की रामलीला में सर्वप्रथम बड़े भाई भूपेश तिवारी के साथ लक्ष्मण की भूमिका निभाई। इसके बाद से वे रामलीला में कई पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। बांस की रामलीला में भी वह लक्ष्मण का अभिनय करते हैं।
छह साल तक बंद रही रामलीला को पुन: शुरू करने में उनका विशेष योगदान रहा। उन्होंने 30 साल बाद पंडा में भी रामलीला की शुरुआत करवाई। दीपक के दो बड़े भाई जिला न्यायालय में वकालत करते हैं। वे भी कई सालों तक रामलीला में राम-सीता जैसे पात्र की निभा चुके हैं। पूरे परिवार रामलीला मंचन में विशेष रुचि रखता है।