इसे मौसम में आ रहे परिवर्तन का कारण ही माना जा रहा है कि ऊपरी रामगंगा घाटी के आमधार फार्म में इस समय कटहल के एक पेड़ में करीब 40 फल लगे हैं। इस पेड़ में अक्तूबर के मध्य में फूल आने शुरू हुए थे। किसानों के साथ-साथ उद्यान विशेषज्ञ भी इससे हैरत में हैं।
पर्वतीय क्षेत्र में आमतौर पर कटहल में मार्च और अप्रैल में फ्लावरिंग होती है। जून से जुलाई तक फल तैयार हो जाते हैं। इस बार घाटी वाले क्षेत्र में अप्रैल और मई में लगातार बारिश के कारण तापमान बढ़ नहीं पाया। उस समय अधिकतम तापमान 18 से 20 डिग्री तक रहा था। अब मौसम साफ होते ही तापमान में बढ़ोतरी होने लगी है। इस समय यहां का अधिकतम तापमान 25 डिग्री तक जा रहा है। ग्राम प्रधान चंद्रकला दानू ने बताया कि उनके बगीचे में सिर्फ एक पेड़ में कटहल के फल लगे हैं। उन्होंने कहा कि कटहल का फल तैयार होने में 90 दिन का समय लगता है। पहली बार नवंबर में कटहल के फलों को देखकर वह आश्चर्य में हैं। उन्होंने कहा कि इस समय जो फल प्रारंभिक अवस्था में है वह दिसंबर अंत और जनवरी मध्य तक तैयार होगा। ऐसा पर्वतीय क्षेत्र में आश्चर्यजनक कहा जा सकता है।
किसानों ने बताया कि पहली बार वे इस तरह की विचित्रता देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बड़े अध्ययन का विषय भी हो सकता है और यदि पर्वतीय क्षेत्र के तापमान में कोई बड़ा परिवर्तन आ रहा है तो इसके लिए फसल चक्र और उद्यान चक्र में बदलाव लाना पड़ेगा।
सही तापमान न मिलना हो सकता है कारण
कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर के उद्यान विशेषज्ञ डा. एके सिंह ने कहा कि मार्च और अप्रैल में कटहल को फ्लावरिंग के लिए सही तापमान नहीं मिला होगा। उन्होंने इस महीने कटहल में फल आने पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि वह खुद इसका अध्ययन करने के लिए नाचनी आएंगे। डा. सिंह ने कहा कि फलों को ठंड से बचाने के लिए उन्हें पॉलीथिन की थैली से ढकना बेहद जरूरी होगा। वह कहते हैं कि यदि नवंबर में पर्वतीय अंचल में कटहल तैयार होता है तो इसे बेमौसमी सब्जी के रूप में विकसित करने के लिए शोध किया जाएगा। डा. सिंह अगले सप्ताह इन फलों को देखने आएंगे।