नाचनी गांव की 250 नाली भूमि को सिंचित करने के उद्देश्य से बनाई गई लिफ्ट सिंचाई योजना ने दम तोड़ दिया है। योजना मेें एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बाद भी स्थिति जस की तस है।
लघु डाल खंड सिंचाई अल्मोड़ा ने वर्ष 2007-08 में रामगंगा नदी से चार लाख रुपये की लागत से लिफ्ट योजना का निर्माण शुरू किया था, जिसका कार्य वर्ष 2010 में पूर्ण हो पाया। योजना में मात्र एक महीने पानी चला। बरसात शुरू होते ही पाइप लाइन ध्वस्त होने लगी। वर्ष 2013 की आपदा में रामगंगा के किनारे बना पंप हाउस नदी में समा गया। 150 मीटर की दूरी पर लगा दूसरा पंप हाउस भी भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो गया। योजना में सुधार के नाम पर आपदा मद से लाखों रुपये खर्च किए गए, फिर भी लाइन ठीक नहीं हो पाई। इस प्रकार योजना में एक करोड़ से अधिक की लागत लग चुकी है।
गांव के कृषक दरपान सिंह पिपलिया, गंगा सिंह पिपलिया, बिमल पाठक, रूप सिंह पिपलिया, पूर्व प्रधान नैन सिंह पिपलिया, लाल सिंह, चंद्र सिंह का कहना है कि रामगंगा नदी से पंपिंग योजना बनाकर जनता और सरकार को धोखा दिया गया है। रबी के सीजन में बोई गई सारी फसल सूखे से चौपट हो गई है। कई किसानों ने सूखी फसल काटकर जानवरों को खिलाना शुरू कर दिया है। कहा कि अगर गांव में पानी आता तो खेत सूखे नहीं रहते और सब्जी व्यवसाय भी ठप नहीं होता।
योजना मरम्मत का गया है प्रस्ताव
लघु डाल खंड सिंचाई विभाग के अवर अभियंता अनिल कुमार का कहना है कि रामगंगा नदी से नाचनी गांव के लिए बनाई गई लिफ्ट योजना का पूरी तरह आकलन कर लिया गया है। अब यह पंपिंग योजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत बनाई जाएगी, जिसके लिए सरकार को 25 लाख की लागत का प्रस्ताव भेजा गया है। धनराशि मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।