पिथौरागढ़। कोविड कर्फ्यू में ढील के दौरान आईटी सेक्टर और कंप्यूटर के प्रतिष्ठानों के न खुलने से लोगों में आक्रोश है। लोगों ने दुकानों को खोलने के लिए प्रदर्शन किया।
कंप्यूटर आदि आईटी सेक्टर के व्यवसाय से जुड़े कारोबारी कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मुकेश पंत के नेतृत्व में सोमवार को कलक्ट्रेट में एकत्र हुए। उन्होंने यहां सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार ने कोविड-19 को देखते हुए कोविड कर्फ्यू में कुछ ढील दी है। इसमें अलग दिन कई प्रतिष्ठानों को खोलने की अनुमति प्रदान की है, लेकिन इसमें आईटी सेक्टर को छूट नहीं दी है।
वक्ताओं ने कहा कि 40 दिनों से दुकान बंद होने के कारण बैंक की किस्तें, बिजली का बिल, कामगारों की तनख्वाह निकालना कारोबारियों के लिए मुश्किल हो रहा है।
इसके बावजूद सरकार ने कोरोना कर्फ्यू में ढील के साथ इन प्रतिष्ठानों को खोलने की अनुमति नहीं दी है। यह अन्याय और भेदभाव है। उन्होंने डीएम आनंद स्वरूप से कंप्यूटर संस्थानों को खोलने की अनुमति भी मांगी।
इस दौरान यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष ऋषेंद्र महर, कंप्यूटर एसोसिएशन के अनिल वर्मा, हेमलता पंत, हिमांशु वर्मा, राजेंद्र भट्ट गौतम, प्रकाश चंद, हेम पंत, आनंद सिंह, प्रकाश चंद, गगन बिष्ट मौजूद रहे।
वड्डा के व्यापारियों ने की मिठाई की दुकानें खोलने की मांग
मूनाकोट (पिथौरागढ़)। राज्य में आठ जून से फिर से कोविड कर्फ्यू के लागू होने के बाद मिठाई व्यापारी दिक्कत में हैं। वड्डा के मिठाई व्यापारियों ने राज्य सरकार से मिठाई की दुकानों को भी खोलने की मांग की है। उन्होंने डीएम को ज्ञापन देकर मिठाई की दुकानें खोलने की मांग की है।
मंगलवार से लागू होने वाले कोविड कर्फ्यू में कई दुकानों को ढील देने से लोगों में खुशी है। राज्य सरकार ने गाइडलाइन में कच्चे माल से निर्मित मिठाई की दुकानों को बिल्कुल ढील नहीं दी है। मिठाई विक्रेताओं की एक मई से दुकानें बंद हैं। दुकानें न खुलने से ग्रामीणों का दूध भी नहीं बिक पा रहा है।
काम करने वाले कारीगर और कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। दुकानों ऋण लेकर लिया गया डीप फ्रीजर बंद होने से खराब होने की स्थिति में है। मिठाई व्यापारी नरेंद्र गिरी की ओर से डीएम के नाम से ज्ञापन भेजा है।
उन्होंने मिठाई की दुकानों को भी सप्ताह में दो दिन खोलने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में ललित सौन, संदीप गिरी, रजवार स्वीट्स, सतौरी स्वीट्स, नेगी स्वीट्स और गोबाड़ी स्वीट्स के संचालक शामिल रहे।