अप्रैल 2014 से पीपीपी मोड के तहत संचालित मुनस्यारी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को हालांकि शुरुआत में भारी जन विरोध का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब अस्पताल प्रबंधन ने व्यवस्थाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
पहले यह अस्पताल मात्र छह डॉक्टरों के सहारे चलाया जाता था, अब इसमें डॉक्टरों की संख्या बढ़कर दस हो गई है। जुलाई से अब तक अस्पताल में छोटे और बड़े मिलाकर 70 ऑपरेशन हो गए हैं। प्रसव के मात्र तीन केश जिला अस्पताल रेफर किए गए। इसके पीछे यह कारण बताया गया कि यहां पर ब्लड बैंक उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल के प्रबंधक उत्कर्ष गंगवाल ने बताया कि 10 अप्रैल 2014 को एक अनुबंध के तहत प्रदेश सरकार ने यह अस्पताल शील नर्सिंग होम बरेली को पीपीपी मोड के तहत संचालित करने को दिया। जुलाई 2015 तक अस्पताल में छह डॉक्टर थे, इनमें बाल रोग, स्त्री रोग और सर्जन उपलब्ध नहीं थे।
जुलाई के बाद व्यवस्था में सुधार के प्रयास किए गए। इस समय अस्पताल में सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, एनीस्थिसिया, स्त्री रोज विशेषज्ञ, दंत रोग विशेषज्ञ एवं तीन इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर्स तैनात हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में जनरेटर तो उपलब्ध है, लेकिन वह जरूरत के मुुताबिक लोड नहीं उठा पा रहा है।
अब अस्पताल में बड़ा जनरेटर लगाने की तैयारी की जा रही है। वह दावा करते हैं कि सीमांत की जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों का इसमें सहयोग मिलता है।