कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर यात्रियों का सामान ले जाने और घोड़ों से यात्रियों को पड़ावों तक पहुंचाने के काम में लगने वाले पोनी, पोर्टर्स के चरित्र सत्यापन की प्रक्रिया शुरू हो गई। करीब 400 युवा पोर्टर्स के काम में लगते हैं, जबकि 100 परिवारों के लोग अपने घोड़ों को यात्रा के समय यात्रियों को ढोने के काम में लगाते हैं। तहसील प्रशासन पोनी और पोर्टर्स का चरित्र सत्यापन करने के बाद उनकी सूची कुमाऊं मंडल विकास निगम को देगा। केएमवीएन इनका पंजीकरण करता है। यह प्रक्रिया हर हाल में 20 मई तक पूरी हो जाएगी।
एसडीएम एसके पांडे के निर्देश पर इन दिनों तहसील प्रशासन पोनी, पोर्टर्स के चरित्र सत्यापन के काम में जुटा है। एसडीएम के अनुसार यात्रियों का सामान पहुंचाने के काम में लगाए जाने वाले लोगों के बारे में सारी जानकारी हासिल की जाती है। पोनी और पोर्टर्स का काम बेहद जिम्मेदारी वाला होता। पोनी और पोर्टर्स के लिए वजन और दूरी के हिसाब से भाड़ा तय किया जाता है। यह भाड़ा जिलाधिकारी तय करते हैं। इस बार भाड़ा बढ़ने से पोनी, पोर्टर्स में काफी खुशी हैं।
उधर, केएमवीएन ने भी अपने स्तर से यात्रा की तैयारी शुरू कर दी है। आधार शिविर में यात्रा शुरू होने से पहले यात्राधिकारी की तैनाती हो जाएगी।
उसी की देखरेख में संपूर्ण यात्रा का समन्वय रहेगा। निगम मई के अंत तक पड़ावों को राशन और बिस्तर पहुंचा देगा। आधार शिविर में निगम का अतिरिक्त स्टाफ तैनात होगा। आधार शिविर में ही पोनी और पोर्टर्स के पंजीकरण की प्रक्रिया निपटाई जाएगी। कैलास मानसरोवर यात्रा जून में शुरू होगी। यात्रियों का पहला दल 12 जून को धारचूला पहुंचेगा।