युवाओं को व्यावसायिक शिक्षा का लाभ देने के लिए जिले में जितने भी राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज खोले गए हैं, उनमें सुविधाओं की काफी कमी है। हालांकि इनमें चयन के लिए पूरी प्रक्रिया को नियमानुसार ही संपन्न कराया जाता है, लेकिन प्रवेश लेने के बाद युवा ठगा सा महसूस करते हैं। कुछ कॉलेज यहां पहले से चल रहे हैं, उनमें भी व्यवस्थाएं ठीक नहीं हैं। नए कॉलेजों के हाल इतने खराब हैं कि युवाओं को प्रवेश लेने के बाद पढ़ाई, प्रैक्टिकल, परीक्षा के लिए अन्य कॉलेजों में जाना पड़ता है।
जिले में गणाईगंगोली, कनालीछीना, मूनाकोट, बरम, बांसबगड़ और बांस में संचालित हो रहे पॉलीटेक्निक कॉलेजों में न तो शिक्षण स्टाफ है और न प्रैक्टिकल की कोई सुविधा है। बरम के विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल के लिए लोहाघाट जाना पड़ता है। बांसबगड़ के विद्यार्थियों को गणाईगंगोली भेजा जाता है। मूनाकोट का कॉलेज तो कई वर्षों तक लोहाघाट में संचालित होता रहा।
नए खुले बरम, बांसबगड़ और बांस के पॉलीटेक्निक कॉलेजों को जीआईसी के भवनों में चलाया जा रहा है। जिले के सबसे पुराने गणाईगंगोली पॉलीटेक्निक कॉलेज में सिर्फ दो ट्रेड चलते हैं। मेकेनिकल ट्रेड में पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं हैं। कॉलेज में 170 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। उनको हमेशा परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस कॉलेज में सिर्फ आईटी ट्रेड में ही सही से पढ़ाई हो पाती है।
आईटीआई के हालत भी खस्ता
जिले में जितने भी आईटीआई खुले हैं, उनमें भी व्यवस्था ठीक नहीं है। अस्कोट के सबसे पुराने आईटीआई में आज भी कई ट्रेडों में शिक्षकों की कमी है। पिथौरागढ़, गुरना, मुनस्यारी में भी आईटीआई तो खोले गए हैं, लेकिन उनमें भी पढ़ाई सही से नहीं हो पा रहा है। व्यावसायिक शिक्षा वाले संस्थानों की यहां जरूरत तो बहुत है, लेकिन सरकार ने इन संस्थानों को खोलने के बाद किसी तरह की सुविधा नहीं दी।
शिक्षा के लिए बाहरी शहरों में जाने की मजबूरी
जिले में व्यावसायिक शिक्षा का कोई माहौल नहीं बन पाया है। आज भी जिले के नौजवानों को व्यावसायिक शिक्षा के कोर्स के लिए देहरादून, दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है, जबकि पॉलीटेक्निक कॉलेज और आईटीआई खोलते समय यही कहा गया था कि व्यावसायिक शिक्षा के लिए अब बाहरी शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा।