अल्मोड़ा से अलग होकर 24 फरवरी 1960 को अलग जिला बना पिथौरागढ़ अभी भी विकास के लिए छटपटा रहा है। 59 साल के लंबे अंतराल के बाद भी जिले के गांवों में बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार तक नहीं हो पाया है।
चीन और नेपाल की सीमा से सटे पिथौरागढ़ जिले को वीर भूमि के रूप में जाना जाता है। देश की सेना में प्रतिनिधित्व के मामले में राजस्थान के झुनझुनु के बाद इस जिले का दूसरा स्थान है। जिले का गठन भी सामरिक लिहाज से हुआ। 1960 में उत्तराखंड के सीमांत इलाकों में पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और चमोली जिले का गठन किया गया।
जिला गठन के साथ ही सेना की गतिविधियां बढ़ने लगी। पिथौरागढ़ में सेना का ब्रिगेड मुख्यालय खुल गया। केंद्र और राज्य सरकार के तमाम कार्यालय खुल गए लोगों को जिला मुख्यालय संबंधी कार्यों के लिए अल्मोड़ा जाने से मुक्ति मिल गई। यहां तक तो सब ठीक था, लेकिन जिला गठन के बाद जिस विकास की उम्मीद की जा रही थी, वह 59 साल बाद भी अधूरी है। आज भी जिले के नामिक, कनार, लछिमा-ओखरानी, आंवलाघाट के साथ ही महाकाली, गोरी, रामगंगा, सरयू घाटी से से सटे इलाकों में यातायात की सुविधा नहीं है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का नितांत अभाव है। जिला मुख्यालय के लिए बनी 12 एमएलडी की आंवलाघाट पेयजल योजना जांच के दायरे में आ गई है। योजना से पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
स्वास्थ्य सुविधा के बुरे हाल
पिथौरागढ़। जिले में डॉक्टरों के 79 पद खाली हैं। जिले में साधारण ग्रेड के 83 चिकित्सकों के पद सृजित हैं, कार्यरत केवल 54 हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के 52 पदों में से 16 ही कार्यरत हैं। महिला चिकित्सकों के 23 पदों में से केवल 9 में डॉक्टर तैनात हैं। अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि जिला अस्पताल में अप्रैल 2018 में स्थापित आईसीयू वार्ड संचालित नहीं होता। ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की घोषणाओं पर अमल नहीं हो रहा। बेस अस्पताल के निर्माण की धीमी गति है तो 2016 में घोषित मेडिकल कॉलेज की बात आगे नहीं बढ़ रही है। ब्यूरो
हवाई सेवा शुरुआत में ही लड़खड़ा गई
पिथौरागढ़। 1993 में बनी नैनीसैनी हवाई पट्टी से इस साल 17 जनवरी से अव्यवस्थाओं के बीच हवाई सेवा शुरू हुई। बुधवार को छोड़कर सप्ताह में छह दिन देहरादून और पिथौरागढ़ के लिए उड़ान हो रही थी। 9 फरवरी को पंतनगर से पिथौरागढ़ आते समय हवा में 9 सीटर विमान का दरवाजा खुल गया था। तब से हवाई सेवा ठप है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय इस विमान को उड़ने की अनुमति नहीं दे रहा है। विमान सेवा का संचालन करने वाली कंपनी एयर हेरीटेज दूसरे विमान की व्यवस्था नहीं कर पा रही है। हवाई सेवा के शुरुआत में ही लड़खड़ाने का भी जनता में गलत संदेश गया है। ब्यूरो
जीवन पांडे थे पहले जिलाधिकारी
पिथौरागढ़। जिले के पहले जिलाधिकारी जीवन चंद्र पांडे थे। उन्होंने 28 फरवरी 1960 को जिलाधिकारी का कार्यभार संभाला था। लोग उनके कार्यों को आज भी याद करते हैं। ब्यूरो
देर सबेर होगा जिले का एक और विभाजन
पिथौरागढ़। 15 सितंबर 1997 को जिले का विभाजन कर चंपावत जिले का गठन हुआ था। जिले का एक और विभाजन डीडीहाट के रूप में देर-सबेर होना है। डीडीहाट जिला बना तो पिथौरागढ़ जिले में पिथौरागढ़ और गंगोलीहाट तहसील ही रह जाएगी।