अपनी बनाई पेंटिंग के साथ आपदा प्रभावित धापा गांव के बच्चे।
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। ‘शाखाएं रहेंगी तो फूल, पत्तियां भी आएंगी, ये दिन अगर बुरे हैं तो अच्छे भी आएंगे’ शायद कुछ ऐसे ही जजबातों के साथ मुनस्यारी के आपदा प्रभावित गांव के बच्चों ने कोरे पन्नों पर चित्रों के माध्यम से उकेरने की कोशिश की है।
जीवन के जिस प्रारंभिक दौर में बच्चे अपनी आंखों से सुनहरे भविष्य के सपने संजोते है, उन्हीं खुली आंखों से मुनस्यारी के धापा गांव के बच्चों ने अपने घर, हरे भरे खेत-खलिहान और खुशहाल गांव को जमींदोज होते हुए देखा है। अपने घरों को छोड़कर जंगलों, टेंटों, स्कूल और पंचायत घरों में रह रहे बच्चों ने कोरे कागजों में जब चित्र उकेरे तो इन बच्चों के मन की बात इन चित्रों में उभरकर आ गई।
बच्चों ने सुंदर पेंटिंग बनाकर खूबसूरत घर, साफ पर्यावरण के साथ ही कोराना से बचाव का संदेश भी देने की कोशिश की है। जिस किसी ने भी इन बच्चों के पेंटिंग देखी भावुक हुए बिना नहीं रहा। मुनस्यारी का धापा गांव 18 और 19 जुलाई को आई आपदा में बुरी तरह से तबाह हो गया था। गांव के 52 परिवार इस समय सरकारी स्कूल, पंचायत भवन या फिर टेंटों में जंगल और खेतों में रहने के लिए मजबूर हैं।