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Pithoragarh News: घर के पास से उठाया, गिरफ्तारी कहीं और दिखाई... पुलिस के झूठ से आरोपी बरी

Fri, 16 Jan 2026 11:00 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़। स्मैक तस्करी के एक मामले में पुलिस की बुनी कहानी ने ही उसकी कार्यप्रणाली की पोल खोल दी। गिरफ्तारी के स्थान और समय को लेकर दी गई दलीलें अदालत में टिक नहीं सकीं। सीसीटीवी फुटेज ने झूठ की परतें उधेड़ दीं और पता चला कि अभियुक्त को घर के पास से उठाया गया था। सुनवाई के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश ने इस मामले में आरोपी को बरी करने का आदेश दिया है।
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मामला 12 मार्च 2023 का है। पुलिस के अनुसार जाजरदेवल के तत्कालीन थानाध्यक्ष, हेड कांस्टेबल और चालक सरकारी वाहन से गश्त पर थे। पंडा क्षेत्र में उन्हें एसओजी टीम एक निजी वाहन में मिली। इसके बाद संयुक्त टीम पंडा बाईपास से नैनीसैनी की ओर बढ़ी। इसी दौरान पैदल चल रहे अमित चंद निवासी धनौड़ा पर शक हुआ। तलाशी लेने पर उसके पास से 9.6 ग्राम स्मैक बरामद होने का दावा किया गया और उसे मौके से गिरफ्तार दिखाया गया। बाद में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया।
बृहस्पतिवार को कोर्ट में इस मामले की अंतिम सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाए तो अभियोजन पक्ष उलझता चला गया। पूछताछ के दौरान पुलिस और एसओजी के बयान आपस में मेल नहीं खा सके। अदालत ने इन विरोधाभासों को गंभीर मानते हुए पुलिस की दलीलों को अविश्वसनीय करार दिया। गिरफ्तारी में विसंगति और बरामदगी को संदेहास्पद मानते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े किए। कोर्ट ने माना कि पुलिस और एसओजी की कहानी तथ्य और सबूतों की कसौटी पर खरी नहीं उतरती। इसी आधार पर आरोपी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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शोरूम के सीसीटीवी फुटेज से सामने आया सच
पुलिस की जीडी में आरोपी की गिरफ्तारी पंडा बाईपास पर एक नामी निजी स्कूल के पास दर्शाई गई थी। वहीं आरोपी के परिजनों का कहना था कि उसे घर के पास से एक निजी कार में जबरन बैठाकर ले जाया गया। इस दावे की जांच के दौरान एक कार शोरूम के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। फुटेज में साफ दिखाई दिया कि आरोपी को घर के नजदीक से एक निजी कार में बैठाया गया और वहां से ले जाया गया।

झूठे मामले में फंसाने के आरोप लगे
जिस कार का इस्तेमाल हुआ वह एसओजी कर्मी के नाम दर्ज पाई गई। सीसीटीवी से यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपी को जिस स्थान से उठाया गया, वहां से करीब एक किलोमीटर दूर उसकी गिरफ्तारी दिखाई गई। बचाव पक्ष ने दलील दी कि युवक को झूठे मामले में फंसाने के लिए जानबूझकर गिरफ्तारी का स्थान और समय बदला गया।

डेढ़ घंटे बाद दिखाई गिरफ्तारी
कोर्ट में पेश फुटेज के अनुसार आरोपी को शाम 3:35 बजे निजी कार में बैठाया गया। इससे अलग पुलिस रिकॉर्ड में उसकी गिरफ्तारी का समय 5:05 बजे दर्ज है। बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि डेढ़ घंटे तक आरोपी कहां रहा और गिरफ्तारी का समय व स्थान क्यों मेल नहीं खाते। इस सवाल का अभियोजन पक्ष कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
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