रामगंगा में अस्याली गांव के लोगों द्वारा तैयार अस्थायी पुल।
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अस्याली गांव के लोगों ने 19 अप्रैल को रामगंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण बहे अस्थायी पुल का निर्माण 11 दिन में दोबारा कर लिया है। अक्तूबर में नदी का जलस्तर कम होने के बाद तैयार किया जाने वाला यह पुल आमतौर पर जून के मध्य तक सुरक्षित रहता है, लेकिन इस बार अप्रैल में रामगंगा का जलस्तर बढ़ गया और पुल समय से पहले ही बह गया था।
अस्याली गांव के लोग पिछले कई सालों से रामगंगा में खुद अस्थायी पुल का निर्माण करते आए हैं। एक सप्ताह पूर्व सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश चंद रजवार ने गांव के लोगों के सामने प्रस्ताव रखा कि अभी मानसून की बारिश शुरू होने में काफी समय है। तब तक आवागमन के लिए फिर से अस्थायी पुल बनाया जा सकता है। लोग इस प्रस्ताव पर राजी हो गए। उन्होंने पुल के लिए लकड़ी तथा अन्य सामग्री का इंतजाम किया। कुछ लोगों ने आर्थिक सहयोग भी दिया। करीब पांच दिन के श्रमदान से लोगों ने 60 फुट लंबा अस्थायी पुल फिर से तैयार कर लिया है।
सोमवार की सुबह से इस पुल से लोगों की आवाजाही होने लगी है। इस पुल से अस्याली गांव के साथ साथ बल्याऊं, सिनटोलिया, ओखलिया, बलीगाड़, कसाड़ी, कनाली, चिफलुवा, ग्वीरा गांव के लोग और स्कूली बच्चे आवागमन करते हैं। जब तक पुल सुरक्षित है तब तक लोगों को पांच किलोमीटर दूर घटीगाड़ झूलापुल तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अस्थायी पुल से नदी पार करने पर थल बाजार की दूरी सिर्फ एक किलोमीटर रह जाती है। पुल के निर्माण में जगदीश चंद, राजेंद्र सामंत, किशन चंद, गोपाल सिंह सामंत, गोविंद महरा, हेमंत सिंह, जितेंद्र बोरा, रघुवीर बोरा, हरीश कुमार, देवेंद्र कुमार, नरेंद्र कुमार आदि ने सहयोग दिया। इतना तय है कि मानसून की बारिश होते ही नदी का जलस्तर बढ़ेगा और पुल फिर से नदी की भेंट चढ़ जाएगा।