गणाई गंगोली (पिथौरागढ़)। हल्द्वानी हाईवे पर क्वारब में दरक रही पहाड़ी ने सीमांत जिले के लोगों की दिक्कत बढ़ा दी है। हल्द्वानी आवाजाही के लिए थल से लेकर मुनस्यारी तक के लोगों को वाया रानीखेत 110 किमी का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ रहा है। ऐसे में माल भाड़ा बढ़ने से क्षेत्र के लोग महंगाई का सामना कर रहे हैं। यात्री अतिरिक्त किराया चुकाने के लिए मजबूर हैं।
दरअसल जिले के थल, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, मुनस्यारी, चौकोड़ी, गणाई गंगोली के लोग हल्द्वानी के लिए वाया अल्मोड़ा आवाजाही करते हैं। अल्मोड़ा के पास क्वारब की पहाड़ी दरकने से टैक्सी अब वाया रानीखेत आवाजाही कर रही हैं। इसके लिए उन्हें 110 किमी का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ रहा है। ऐसे में इस रूट पर यात्रियों को एक तरफ का 100 रुपये अतिरिक्त किराया चुकाना पड़ रहा है। दूरी अधिक तय करने से ट्रांसपोर्टरों ने भी 100 रुपये क्विंटल भाड़ा बढ़ाया है। भाड़ा बढ़ने से फल, सब्जी, राशन, निर्माण सहित अन्य सामग्री महंगी हो गई है। आलू, प्याज, टमाटर सहित अन्य खाद्य सामग्री के दाम दो से तीन रुपये किलो बढ़ गए हैं। संवाद
एंबुलेंस का किराया भी दो हजार बढ़ा
गणाई गंगोली। गणाई गंगोली, मुनस्यारी, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट सहित आसपास के हिस्सों के मरीज भी हल्द्वानी के लिए वाया अल्मोड़ा आवाजाही करते हैं। क्वारब में पहाड़ी दरकने से उनके लिए समय पर अस्पताल पहुंचना भी चुनौती बन गया है। वहीं वाया रानीखेत दूरी अधिक होने से एंबुलेंस संचालकों को किराया बढ़ाना पड़ा है। पूर्व में बेड़ीनाग, गंगोलीहाट से हल्द्वानी तक एंबुलेंस का किराया चार हजार था जो अब बढ़कर छह हजार हो गया है।
बोले लोग
क्वारब में पहाड़ी दरकने से दिक्कत झेलनी पड़ रही है। हल्द्वानी तक अधिक दूरी तय करने के साथ ही अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। राशन, फल, सब्जियां भी भाड़ा बढ़ने से महंगी हो गई हैं। -गोविंद पंत, गणाई गंगोली।
दूरी अधिक होने से भाड़ा बढ़ाना पड़ा है। ईधन और समय अधिक लग रहा है। क्वारब में सड़क ठीक होने के बाद राहत मिलने की उम्मीद है। - शंभू सिद्धार्थ पांडे, व्यापारी।
क्वारब में सड़क बंद होने से दिक्कत हो रही है। बाया रानीखेत आवाजाही करने में अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। न जाने कब राहत मिलेगी। - देवेंद्र मेहता, गणाई गंगोली।
माल वाहक वाहन बाया रानीखेत आवाजाही कर रहे हैं। अधिक दूरी होने से भाड़ा बढ़ा है। क्वारब में सड़क ठीक होने के बाद व्यवस्था पटरी पर आएगी। - प्रमोद डसीला, ट्रांसपोर्टर।