पिथौरागढ़ के नैकिना गांव में वन विभाग द्वारा बनाया गया तालाब
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जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर 1958 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नैकिना गांव में वन विभाग ने करीब एक करोड़ लीटर क्षमता के एक तालाब का निर्माण किया है। 500 मीटर लंबे और 100 मीटर चौड़े इस तालाब की गहराई एक मीटर रखी गई है। वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि मिट्टी और पानी संरक्षण की दिशा में यह अभिनव प्रयोग हुआ है।
पिथौरागढ़ वन प्रभाग के डीएफओ विनय भार्गव के अनुसार नैकिना में खाली स्थान पर एक बड़ा मैदान है। इस मैदान में तालाब बनाने के लिए बहुत कम छेड़छाड़ की गई। सिर्फ पानी रोकने के लिए बंध तैयार किए गए। यह सारा पानी बरसाती पानी का ही है। पिछले साल मार्च में तालाब का निर्माण किया गया। एक वर्ष में ही क्षेत्र में जल धारण की क्षमता में काफी सफलता मिल गई। दावा है कि तालाब बनने से निचले इलाकों पर स्थित नौलों में पानी बढ़ गया और पानी के दो नए स्रोत भी फूट गए। नमी बढ़ने से चारा घास का उत्पादन भी बढ़ने लगा है। पूरे इलाके में नमी का स्तर बढ़ने के बाद वन विभाग ने मार्च 2017 में इस इलाके में चीड़ के जंगलों के बीच में नाशपाती और सेब के 4000 पौधों का रोपण भी कर दिया। तालाब में बरसाती पानी का संग्रह होने से अब नालों का प्रवाह नहीं बढ़ रहा है और मलबा आने से पिथौरागढ़-दिगतोली रोड बंद होने जैसी समस्या भी दूर हो गई है।
इस काम से खासा उत्साहित वन विभाग ने अब नैकिना और आसपास के इलाकों में 125 हेक्टेयर में फैले चीड़ वन क्षेत्र में नए काम के प्रस्ताव तैयार किए हैं। इनमें भी इसी तरह के तालाबों का निर्माण किया जाएगा। वन क्षेत्राधिकारी दिनेश चंद्र जोशी ने बताया कि ऊंचाई वाले इलाके में तालाब का निर्माण करने से निचले इलाके में पानी के स्रोत फिर से जीवित होंगे और लोगों को साफ पानी उपलब्ध होगा। ठुलीगाड़, मटेला, आंवलाघाट में भी इसी तरह के तालाब बनाए जाएंगे।