थल के गोल गांव में ठप पड़ी लिफ्ट सिंचाई योजना
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मल्ला गोल, सिमार, जौरासी, माता की कुटिया, टमटौड़ा और गणेश का डांडा गांवों के लिए वर्ष 2009 में एक करोड़ रुपये की लागत से बनी लिफ्ट सिंचाई योजना बेकार पड़ी है। इस योजना से अब तक पानी की एक बूंद खेतों तक नहीं पहुंची है। इस कारण 55 हेक्टेयर जमीन पर सिर्फ धान की बुआई की जाती है। गेहूं की बुआई के समय खेत सूखे रहते हैं। इस कारण कई वर्षों से लोग अपने खेतों में सिर्फ एक ही फसल उगा रहे हैं। पहले गांव के लोगों ने सिंचाई के लिए श्रमदान से नहर का निर्माण किया था। जब से लिफ्ट सिंचाई योजना बनी तभी से श्रमदान से बनी नहर का अस्तित्व भी समाप्त हो गया।
बताया गया कि लघु सिंचाई विभाग ने पानी लिफ्ट करने के लिए करीब 14 लाख रुपये की लागत से दो पंप लगाए थे। यह पंप योजना के उद्घाटन के दिन भी नहीं चल पाए। विभाग ने इन पंपों को बदलने और मरम्मत की जरूरत भी नहीं समझी।
विभाग की योजना थी कि रामगंगा से पानी लिफ्ट कर सभी गांवों तक पहुंचाया जाएगा, लेकिन योजना विफल होने के बाद किसी भी अधिकारी ने पलटकर नहीं देखा। इस मामले में लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता अनिल कुमार का कहना है कि पंपों को जल्दी चलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर बंद पड़ी लिफ्ट सिंचाई योजना में पानी चलने लग जाएगा।
यह किसानों के साथ धोखा है
गोल गांव की गोविंदी देवी का कहना है कि जो योजना सफल नहीं होती, उस पर लाखों रुपये खर्च करने की क्या जरूरत है। यह सरासर धन का दुरुपयोग है और किसानों के साथ धोखा भी है। वह कहती हैं कि बिना पानी के फसल उगा पाना संभव नहीं है। सरकार ने कभी भी बंद पड़ी योजनाओं के बारे में सोचा तक नहीं है।
किसानों को नुकसान का मुआवजा दें
गोल निवासी भागीरथी देवी का कहना है कि जब लिफ्ट सिंचाई योजना संचालित नहीं हो पाई तो उसी समय उसकी कमियों का पता लगाया जाना चाहिए था। वह कहती हैं कि योजना निर्माण में बड़ी खामियां रही हैं। यदि जांच की जाए तो कई अधिकारी नप जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को नुकसान का मुआवजा दिया जाए।