पिथौरागढ़ जिले में जंगली मशरूम खाने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब धारचूला के छलमा छिलासों गांव में भाई-बहन सहित चार लोगों की जंगली मशरूम खाने तबीयत बिगड़ गई। सीएचसी में प्राथमिक इलाज के बाद गंभीर हालत को देखते हुए चारों को हायर सेंटर रेफर किया गया। सभी का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
धारचूला निवासी सूरज वर्मा (30) बीते सोमवार को अपनी बहन सुनीता (46) निवासी छलमा छिलासों गांव से मिलने उसके घर गया था। बहन ने भाई के लिए जंगली मशरूम की सब्जी बनाई। सूरज ने बहन सुनीता, भांजे अनुराग (13) और भांजी प्रियांशी (6) के साथ भोजन किया। जंगली मशरूम की सब्जी खाने के कुछ देर बाद ही सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। चारों को उल्टी और दस्त शुरू हो गए और स्वास्थ्य गिरता चला गया।
आननफानन परिजनों ने चारों को सीएचसी धारचूला पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक इलाज के बाद सभी को हायर सेंटर रेफर कर दिया। देर रात करीब 10 बजे परिजन सभी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। सभी को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक फिलहाल सभी की हालत स्थिर है।
जंगली मशरूम खाने से नानी और नातिन की हो चुकी है मौत
सीमांत जिले में जंगली मशरूम खाने से लोग बीमार होने के साथ ही मौत के मुंह में भी समा रहे हैं। पिछले दिनों मुनस्यारी में जंगली मशरूम खाने से कुंती देवी और उनकी नातिन दीया की मौत हो गई थी। यह मामला काफी चर्चाओं में रहा था। इसके अलावा अब तक जंगली मशरूम खाने से आठ अन्य लोग गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल पहुंचे हैं जिनकी बमुश्किल जान बचाई जा सकी।
जंगली सब्जियों का न करें सेवन
जंगली सब्जियों खासकर जंगली मशरूम और लिंगुड़ा खाने से लोगों की हालत गंभीर होने के लगातार सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक लोगों को जंगली सब्जियों का सेवन करने से बचना चाहिए। चिकित्सकों के अनुसार जंगल में उगने वाले मशरूम की कुछ प्रजाति जहरीली होती है। बगैर पहचान के लोग इसका सेवन कर रहे हैं जिससे उनकी जान पर बन आती है। कई केसों में समय पर इलाज न मिलने से लोगों की जान बचाना भी मुश्किल हो जाता है।
जंगली मशरूम खाने से बीमार चारों लोगों का इलाज चल रहा है। सभी की हालत खतरे से बाहर है। घरों के आसपास और खेतों में उगने वाले जंगली मशरूम का सेवन करना खतरनाक हो सकता है। लोगों को इसके प्रति जागरूकता दिखानी होगी।
- डॉ.भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़