पिथौरागढ़। सीमांत जिले में शिक्षा व्यवस्था दम तोड़ रही है। जिले के विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। अब शिक्षकों के स्थानांतरण और सेवानिवृत्ति से जिले के 47 प्राथमिक विद्यालय शिक्षक विहीन हो गए हैं। यह स्थिति सरकारी स्कूलों में बच्चों को प्रवेश दिलाने की कवायद को झटका ही है।
जिले में संचालित 993 प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के 2120 पद स्वीकृत हैं। 608 शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इस बीच, 435 शिक्षक स्थानांतरण नीति और सेवानिवृत्ति के दायरे में आए। नतीजतन, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, धारचूला, मुनस्यारी और डीडीहाट विकासखंडों में 47 प्राथमिक विद्यालय शिक्षक विहीन हो गए हैं।
शिक्षकों का तबादला करते वक्त विभाग यह भूल गया कि एक भी शिक्षक की तैनाती न होने से इन विद्यालयों में पढ़ने वाले 350 से अधिक विद्यार्थियों का क्या होगा। कौन इन्हें पढ़ाएगा और उनका भविष्य गढ़ेगा। संवाद
अन्य विद्यालयों का रुख करना मजबूरी
एक भी शिक्षक न होने से अभिभावक इन स्कूलों से अपने बच्चों की टीसी कटवाकर दूसरे विद्यालयों में उन्हें प्रवेश दिला रहे हैं। यदि सभी विद्यार्थियों ने इन स्कूलों से किनारा किया तो छात्र संख्या शून्य होने से इनमें ताले लटकना तय है।
कोट
स्थानांतरण नीति के तहत दुर्गम में तैनात शिक्षकों का स्थानांतरण करना अनिवार्य था। इन विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था की जा रही है। नई नियुक्ति के लिए प्रक्रिया गतिमान है। जल्द शिक्षकों की तैनाती होगी। - अशोक कुमार जुकरिया, मुख्य शिक्षा अधिकारी, पिथौरागढ़।