बलुवाकोट-पय्यांपौड़ी रोड पर जीप की छत में लदे यात्री
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस और परिवहन विभाग के दावों से हटकर यदि जिले के आंतरिक मार्गों की स्थिति पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलेगा कि इन मार्गों पर ट्रैफिक का कोई नियम नहीं चलता। जैसे ही पुलिस की चौकी और थाने से यह वाहन एकांत सड़कों की ओर बढ़ते हैं तो कायदे कानूनों की धज्जियां उड़ने लगती हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ओवरलोड वाहनों पर चढ़ने की जिद खुद यात्री करने लगते हैं। इन मार्गों पर चलने वाले वाहनों की संख्या बहुत कम होती है। यदि इक्का-दुक्का वाहन चला तो सभी यात्री उसमें सवार हो जाते हैं।
चालकों का कहना है कि यदि किसी को गाड़ी में बैठने से मना किया गया तो लड़ने-झगड़ने को उतारू हो जाते हैं। इन वाहनों की छतों पर लोगों के सामान के साथ-साथ यात्री भी चढ़ जाते हैं। वाहन के अंदर पहले ही क्षमता से ज्यादा सवारियां बैठ जाती हैं। बलुवाकोट से पय्यांपौड़ी जाने वाली जीपों में तो 20 से 25 तक लोग रोजाना सफर करते हैं। वाहन चालकों को भी पता रहता है कि आंतरिक मार्ग पर प्रवेश करते ही कोई चेकिंग वाला नहीं मिलेगा। इन दूरस्थ इलाकों पर चलने वाले वाहनों की फिटनेस और यांत्रिक जांच नहीं होती। यह सड़क इतनी खराब है कि इसमें सामान्य तरीके से ही वाहन चलाने में दिक्कत आती है। जिले में स्टेट हाइवे और नेशनल हाइवे से हटकर गांवों को जोड़ने वाले जितने आंतरिक मार्ग हैं, उनमें नियमों की इसी तरह धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
परिवहन विभाग के पास स्टाफ नहीं
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी नवीन सिंह का कहना है कि उनके पास जिले में वाहनों की चेकिंग के लिए सिर्फ एक टीम है। यही टीम जिलेभर में चेकिंग करती है। यदि किसी नगर या तहसील मुख्यालय का टूर लगा तो उससे जुड़े सभी आंतरिक मार्गों की चेकिंग कर ली जाती है। आंतरिक मार्गों पर नियमित चेकिंग कर पाना संभव नहीं होता।
थाना प्रभारी को चेकिंग पर भेजा जाएगा
पुलिस क्षेत्राधिकारी शेखर सुयाल ने कहा कि ओवरलोडिंग रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। यदि आंतरिक मार्गों पर ओवरलोडिंग हो रही है तो उस क्षेत्र के थाना प्रभारी को चेकिंग के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि बलुवाकोट-पय्यांपौड़ी रोड की अब लगातार चेकिंग होगी और ओवरलोडिंग पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।