फोटो-07 पीटीएच 02 पी-कुंदन लाल। फाइल फोटो।
गणाई गंगोली(पिथौरागढ़)। पहाड़ की मजबूरी और बदहाल व्यवस्था की एक और दर्दनाक कीमत जमतोला के 50 वर्षीय कुंदन लाल को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। सर्पदंश का शिकार हुए कुंदन को जब तक अपनों के कंधों और डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाया जाता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने एक हंसता-खेलता परिवार उजाड़ दिया।
खेत में काम कर रहे जमतोला के ताल निवासी कुंदन लाल पुत्र गुंसाई राम को बीते बृहस्पतिवार देर शाम सात बजे के करीब सांप ने डस लिया। परिजन और ग्रामीण डोली के सहारे उन्हें लेकर अस्पताल के लिए रवाना हुए। बदहाल रास्ते पर डेढ़ किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पर पैदल और इसके बाद पांच किलोमीटर की जर्जर सड़क पर वाहन से सफर कर घायल को रात करीब 8:45 बजे बनकोट तक पहुंचाया गया।
वहां से उन्हें 14 किलोमीटर दूर पीएचसी गणाई पहुंचाया गया जिसमें रात के 10 बज गए। बमुश्किल घायल पीएचसी पहुंचे तो कुछ समय बाद ही इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि अस्पताल पहुंचने में बहुत देर हो गई है।
ग्राम प्रधान चंदन सिंह मेहता ने कहा कि अस्पताल देरी से पहुंचने में कुंदन को काल के गाल में समाना पड़ा। यदि गांव तक सड़क होती तो समय पर उन्हें अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। ऐसे में शायद उनकी जान बच सकती थी। उनकी मौत से परिजनों में कोहराम है तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
स्वास्थ्य कर्मियों पर अभद्रता का लगाया आरोप
प्रधान चंदन सिंह मेहता ने बताया कि घायल को पीएचसी पहुंचाने पर किसी स्वास्थ्य कर्मी ने उसे रिसीव नहीं किया। परिजनों को खुद स्ट्रेचर लाकर घायल को बिस्तर तक पहुंचाना पड़ा। ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स ने दूरी बनाए रखी और केवल निर्देश दिए। बाद में आए डॉक्टर ने भी परिजनों को कैंची थमाकर पट्टी हटाने को कहा। जब परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई, तो उन्होंने अभद्रता की और पुलिस में शिकायत की धमकी देते हुए बाहर जाने को कहा। प्रधान मेहता ने अस्पताल के स्टाफ से मरीजों से उचित व्यवहार करने की मांग की है।
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सर्पदंश से घायल को देरी से अस्पताल लाया गया। मुझ पर और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों पर लगाए आरोप निराधार हैं। मैं दिन-रात मरीजों को देख रहा हूं।-
डॉ. शशांक शेखर कविदयाल, प्रभारी चिकित्साधिकारी, पीएचसी गणाई गंगोली