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कस्की होल इलाज सुविदा नाम पर क्ये नि हई,मरीजकणि रैफर कर दिनान.....................

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अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोचर। - फोटो : PITHORAGARH
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थल (पिथौरागढ़)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोचर पिछले 22 साल से रेफर केंद्र बना हुआ है। करीब 600 गांवों से घिरे इस क्षेत्र में लोगों की सुविधा के लिए अक्तूबर 2000 में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री बची सिंह रावत ने चार बिस्तर युक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) का लोकार्पण किया था। सुविधा के नाम पर यहां मरीज को केवल प्राथमिक उपचार के बाद जिला मुख्यालय या हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। यहां न अल्ट्रासाउंड मशीन है, न एक्सरे मशीन है।
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हड्डी टूट जाने पर एक्सरे और प्लास्टर की कोई सुविधा नहीं। गंभीर रोगी के स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं के बच्चे की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन न होने से लोगों को 300 किमी दूर हल्द्वानी के चक्कर लगाने होते हैं। सरकार ने पिछले तीन माह से इस अस्पताल को ग्रेड दो से हटाकर उससे नीचे ग्रेड ए कर दिया है। इसमें मरीजों को अब सुविधा एपीएचसी की मिल रही है। दो डॉक्टरों के इस अस्पताल में अब डॉक्टर का केवल एक पद सृजित है। आखिर कब तक लोगों के स्वास्थ्य से साथ खिलवाड़ होता रहेगा। छह तहसीलों से घिरे इस मुख्य कस्बे में मरीज अपना इलाज करने आते हैं। इतने बड़े क्षेत्र में 22 साल से पीएचसी का उच्चीकरण नहीं हो सका है। इस कारण स्वास्थ्य सुविधा भी क्षेत्र से मुख्य पलायन का एक कारण बन गया है।
खून जांच में एक सप्ताह का लग रहा समय
थल (पिथौरागढ़)। जांच के नाम पर यहां एक माह से अब खून जांच होने लगी है। वो भी खून का सैंपल लेकर जिला मुख्यालय भेजी जा रही है। वहां से दो दिन बाद खून जांच की रिपोर्ट का मैसेज मोबाइल फोन पर आ रहा हैं। जांच की रिपोर्ट का पर्चा एक सप्ताह में मरीज को मिल रहा हैं। पैथोलॉजी न होने से स्टूल जैसे अन्य जांच का भी अभाव रहा हैं। हार्ट की ईसीजी की कोई सुविधा नहीं हैं।
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गोचर स्वास्थ्य केंद्र 600 गांवों से घिरा है। यहां प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर होना अधिकतर मरीजों की मजबूरी है। ऐसा अस्पताल जिस पर इतनी बड़ी आबादी निर्भर है। जांच सुविधाएं भी नहीं। - प्रमोद उपाध्याय, सत्यालगांव।
स्वास्थ्य केंद्र लोगों के लिए एकमात्र रेफर सेंटर है। सरकार सीमांत के दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सुविधा बेहतर करने की बात करती है। 22 साल से रेफर बने इस केंद्र में दो के बजाय अब एक ही चिकित्सक है। - भूपेश चंद्र, प्रधान लेजम।
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