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मई में बारिश का पिछले पांच सालों का रिकार्ड टूटा

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पिथौरागढ़। सीमांत जिले में पिछले कई दिनों से रुक-रुक कर लगातार बारिश हो रही है। इससे सूख चुके प्राकृतिक जल स्रोतों में जान आ गई है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके थे।
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इससे ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराने लगा था। फरवरी, मार्च, अप्रैल में बारिश न होने के कारण रबी की फसल को काफी नुकसान पहुंचा था, लेकिन मई के शुरुआत से बदले मौसम के मिजाज ने बारिश का पिछले पांच सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस बार 772.4 मिमी बारिश हो गई है। अब भी बारिश का क्रम लगातार जारी है।
जिले में हर साल मानसून से पहले हर साल प्री मानसून बारिश होती है। सीमांत जिले में वर्ष 2017 में 772.4 मिमी बारिश हुई। वर्ष 2018 में 605.1 मिमी, वर्ष 2019 में 241.6 मिमी, 2020 में 667.6 मिमी और 2021 में 772.4 बारिश हो गई है। बारिश का क्रम अब भी जारी है।
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लंबे समय बाद हो रही बारिश को खेती के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है, लेकिन भूस्खलन, आपदा की घटनाओं का डर भी है। पिछले चार माह से बारिश न होने के कारण रबी की फसलों और बागवानी को काफी नुकसान हुआ था। लगातार हो रही बारिश के बाद किसानों के चेहरे खिले हैं।
भारी बारिश के साथ खरीफ की फसलों की बुआई शुरू
पिथौरागढ़। भारी बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी हो गई है। किसानों ने खरीफ की फसल धान, मडुवा की बुआई शुरू कर दी है। किसान शेर राम का कहना है कि लगातार हो रही बारिश धान के लिए काफी अच्छी है।
मई में लगातार बारिश हो रही है, जो अच्छा संकेत है। खरीफ की फसलों को इससे लाभ मिलेगा। गर्मियों में सूख चुके प्राकृतिक जल स्रोत रिचार्ज हो जाएंगे।
-बिक्रम सिंह, वरिष्ठ मौसम विज्ञानी देहरादून।
लंबे समय तक सूखा रहा। अब लगातार हो रही बारिश अच्छा संकेत है। पिछले माह जंगलों की आग से प्राकृतिक वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा था। बारिश के बाद वापस हरियाली लौटने लगी है। जलस्रोत भी रिचार्ज हुए हैं। यह बारिश गर्मी में पेयजल संकट से उबरने में सहायक होगी।
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-डॉ. पीतांबर अवस्थी, पर्यावरणविद पिथौरागढ़।
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